भूकंप के झटकों ने नगर पालिका परिषद के निर्माण कार्यों की पोल खोल दी है। खास बात यह है कि खुद नगर पालिका ने ही इस शवदाह गृह का निर्माण करवाया था। नगर पालिका के ठेकेदार सुनील ने 1.87 लाख की लागत से इसे बनवाया है। इसमें सीमेंट के स्थान पर बालू भरी हुई थी, जो मामूली भूकंप के झटके के साथ धराशाई हो गई और एक मजदूर की जान चली गई। इस घटना के बाद भी आला अफसरों की आंखें न खुलें तो हैरत होगी।
मंगलवार को दोपहर 12:37 बजे भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। तब इस नवनिर्मित नगर पालिका के शवदाह गृह की स्लेब की बल्लियां हटाईं जा रही थीं। भूकंप की तीव्रता 6.9 रिक्टर नापी गई।
भूंकप में जर्जर इमारतें जहां की तहां खड़ी रहीं, लेकिन नगर पालिका का नवनिर्माणाधीन शवदाह गृह भरभराकर गिर गया। मजदूर की मौत के बाद पुलिस अधीक्षक दिनेश पाल सिंह व एसडीएम प्रवीणा अग्रवाल पहुंचीं।
एसडीएम ने माना कि यह घटना भूकंप के कारण हुई है। भवन का घटिया निर्माण कराया गया है, इसकारण यह भरभरा कर गिर गया। इसकी जांच कराने के बाद संबंधित विभाग पर कार्रवाई होगी।
उधर, नगर पालिका के ईओ और चेयरमैन प्रतिनिधि इसे निर्माणाधीन बता रहे हैं। सवाल उठता है कि स्लेब खुलने के बाद वह धराशायी क्यों हुई? क्या छत को पकने से पहले खोला गया। यदि ऐसा है तो यह भी जांच का विषय है।
वहीं, भूकंप में हुए हादसे के बाद इस घटिया निर्माण की लोग निंदा कर रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कमीशनबाजी की वजह से नगर पालिका अध्यक्ष, ईओ और अन्य प्रशासनिक अफसर घटिया निर्माण कार्यों पर भी आंखें मूंदें हैं। ठेकेदार सुनील से मोबाइल पर बात करने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
नगर पालिका चेयरमैन के प्रतिनिधि बाल्मीकि गोस्वामी ने कहा कि भवन निर्माणाधीन था। फिलहाल भूकंप के झटके से भवन के गिरने की जानकारी मिली है। इससे ज्यादा कुछ नहीं कह सकते।
नगर पालिका के अधिशाषी अधिकारी राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि भवन 13 फुट के पिलर पर खड़ा था। चबूतरा नहीं बना था। निर्माणाधीन होने के चलते भूकंप आने पर हादसा हुआ है। फिर भी मैटेरियल का सैंपल ले लिया है। इसे एसबीटीआई कानपुर जांच के लिए भेजा जाएगा।
जिलाधिकारी संध्या तिवारी बोलीं कि संबंधित ईओ को कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। उनसे मैटेरियल का सैंपल लेने को कहा गया है।