सरीला कस्बे में कजली विसर्जन का आयोजन ब्लाक रोड पर
बने गुरखुरू तालाब में किया गया। महिलाओं ने सावन गीत भी गाए तो कई जगह
कीर्तन हुआ। उधर क्षेत्र के भेड़ी गांव में बेतवा नदी किनारे बने प्राचीन
घाट पर कजलियों का विसर्जन किया गया।
महिलाएं सिर पर कजली के खप्पर रखकर
सावन गीत गाते हुए गांव भ्रमण करते हुए नदी किनारे पहुंची। इसी प्रकार
क्षेत्र के धौहल, चंडौत, ममना आदि गांवो में कजली विसर्जन किया गया।
राठ
प्रतिनिधि के अनुसार, रविवार दोपहर बजरिया में कजली मेले के दौरान विभिन्न
क ार्यक्रम आयोजित हुए। दोपहर बाद महिलाओं ने घर पर बोई कजरियों को सिर पर
रख सागर तालाब में खोंट कर विसर्जन किया।
जिसे देखने के लिए महिलाओं की
खासी भीड़ उमड़ी। महिलाएं कजली गीत गाती चल रहीं थी। बजरिया चौराहे पर लगे
मेले में लोगों ने पहुंच कर मेले का लुत्फ उठाया।
मेले में बुंदेलख्ंाड लोक
नृत्य पर आधारित सारंगी और खजली की थाप पर नृत्य का लोगों ने खूब आनंद
लिया। सारंगी गायकों ने विभिन्न रचनाएं सुनाकर लोगों की वाहवाही लूटी।
मेले
में बच्चों ने पहुंच खेल खिलौनों की खूब खरीददारी की। मेले में सबसे
ज्यादा भीड़ महिलाओं की रही।