मूसलाधार बारिश से खेतों में कटी पड़ी गेहूं की बची-खुची फसल भी बर्बाद हो गई। खेत में पड़े गेहूं के सड़ने की आशंका बढ़ गई है।
किसानों
का कहना है कि मौसम के कहर से बर्बाद हो गए। जिन खेतों में बंधियां हैं,
उनका पानी नहीं निकल पाया, जिससे फसलें जलमग्न है। किसान मेड़ काटकर पानी
निकालने का प्रयास कर रहे हैं। हालात यह है कि नीचे से फसलों में दीमक लगनी
शुरू हो गई हैं।
कई दिनों से हो रही बारिश से किसान खेतों में काम
नहीं कर पा रहा है। बची खुची फसलें भी बारिश से बर्बाद हो रही हैं।
मंगलवार की शाम तीन घंटे तक जबरदस्त बारिश हुई। सुमेरपुर प्रतिनिधि के
अनुसार इंगोहटा, टेढ़ा, बंडा, पलरा, नदेहरा, चंदौलीजार, मवईजार सहित कई
गांवो में खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसलें पूरी तरह से भींग गईं।
टेढ़ा
गांव में बंधी में पानी एकत्र हो जाने से निचले क्षेत्र की फसलें जलमग्न
हो र्गइं। पानी भरने से गेहूं की फसलें सड़ने की कगार में पहुंच गई है।
टेढ़ा के किसान सौरभ सिंह, गोपीश्याम द्विवेदी, पंधरी के नवीन सिंह सहित
अन्य किसानों ने बताया कि बेमौसम बारिश किसानों पर कहर बनकर बरस रही है।
फसलें
पूरी तरह से बर्बाद होती जा रही हैं। कि सानों ने प्रशासन से नए सिरे से
सर्वे कराकर मुआवजा दिलाने की गुहार लगाई है। गहरौली प्रतिनिधि के अनुसार
बारिश के ओलावृष्टि के चलते इमिलिया और गहरौली गांव में बची खुची सैकड़ों
बीघा फसल खेताें में ही नष्ट होने लगी है।
हालात यह है कि नीचे से
फसलों में दीमक लगनी शुरू हो गई है। अभी तक 70 फीसदी फसल नष्ट हो चुकी है।
इमिलिया हार में हुई ओलावृष्टि ने बची खुची कसर पूरी कर दी। किसान
सत्यप्रकाश राजपूत, लखन राजपूत, अरविंद, मान सिंह, भोला व उदयभान सिंह
राजपूत ने बताया कि 25 से 30 ग्राम तक का ओला गिरा है।
ग्राम
प्रधान प्रतिनिधि बीरबल चौधरी ने डीएम व एसडीएम से मिलकर शीघ्र राहत दिलाए
के साथ सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। मुस्करा प्रतिनिधि
के अनुसार तेज आंधी के बीच हुई बरसात में ओलावृष्टि हुई। इससे बची खुची
फसलें जमींदोज हो गईं।
किसान मदनमोहन राजपूत, अनिरुद्ध सिंह
मुस्करा, चारथोक निवासी योगेश अग्रवाल ने फसलों पर शीघ्र मुआवजा दिलाने की
मांग की है। कहा कि सबसे ज्यादा भूसे की परेशानी होगी। कुरारा प्रतिनिधि के
अनुसार तेज बारिश से किसान सकते में आ गए है।