थाना बिवांर के छानीखुर्द गांव में सात साल पहले दलित युवक की हत्या के मामले की सुनवाई बुधवार को विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी एक्ट) संतोष कुमार श्रीवास्तव की अदालत में हुई। अदालत में अभियुक्त को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।अपर जिला शासकीय अधिवक्ता
राकेश कुमार यादव ने बताया कि छानीखुर्द गांव में 22 जून 2010 को दोपहर में मानसिक रूप से कमजोर महावीर अपने दरवाजे पर बैठा था। वहां छोटे-छोटे बच्चे उसे कंकड़ मारकर परेशान करने लगे। इस पर वह भी बच्चों पर कंकड़ फें कने लगा। इसी बीच पड़ोसी सहाय उर्फ श्रीपत सहाय पुत्र लल्लू
प्रजापति ने महावीर को उठाकर जमीन पर पटक कर पिटाई कर दी। यह देख महावीर की मां इमरती व भाभी सरमन ने शोर मचाया और बचाने दौड़ी तो सहाय (अभियुक्त) भाग निकला। परिजन घायल महावीर को छानी स्थित अस्पताल ले गए। वहां से उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। लेकिन रास्ते में
उसकी मौत हो गई। मामले में मृतक के भाई टिरिया ने थाना बिवांर में श्रीपत सहाय के खिलाफ तहरीर दी। पुलिस ने गैर इरादतन हत्या के साथ दलित उत्पीड़न की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। बुधवार को विशेष न्यायाधीश संतोष कुमार श्रीवास्तव की अदालत में अभियुक्त श्रीपत सहाय को आजीवन कारावास व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई।