मौदहा कस्बे में सबसे बड़े रकबे में फैले मीरा तालाब के दिन
बहुरने की उम्मीद बढ़ गई है। तालाब की भूमि पर भारी अतिक्रमण कर गेहूं की
खेती करने पर अमर उजाला ने इस खबर को 27 अप्रैल को प्रमुखता से प्रकाशित
किया था। फिलहाल जिलाधिकारी संध्या तिवारी की पहल पर रविवार को तालाब की
नापजोख शुरू हुई, इसी के साथ जेसीबी से खुदाई का कार्य नगर पालिका परिषद ने
शुरू करा दिया है।
मीरा तालाब 50 एकड़ से अधिक रकबे में फैला है।
मौजूदा समय में पूरी तक सूख चुका है। इस तालाब की भूमि पर अवैध तरीके से
गेहूं की खेती की जा रही है, साथ ही तालाब का पानी सिंचाई में इस्तेमाल
किया जा रहा है।
यह तालाब अपने धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व के लिए प्रसिद्ध
हैं। यहां पर कंस वध व नागनाथन लीला होती है। तालाब में कभी कमल की खेती
होती रही है। वहीं आज तालाब की स्थिति यह है कि इसके भीटों में अतिक्रमण
है।
लोगों नेकब्जा कर पक्के भवन बना रखे हैं। जिलाधिकारी के आदेश पर
रविवार को नगर पालिका परिषद ने इस कार्य की पहल कर दी। तालाब के रकबे की
नपाई हुई इसी के साथ जेसीबी से खुदाई का काम शुरू हो गया।
पालिका परिषद
अध्यक्ष प्रतिनिधि बाल्मीकि गोस्वामी व सभासद तथा पालिका कर्मी सुशील व
कामता ने सुबह से ही इस तालाब की खुदाई का कार्य प्रारंभ करा दिया। वहीं
लेखपाल द्वारा इसकी पैमाइश का कार्य भी शुरू हुआ।
अध्यक्ष प्रतिनिधि ने
बताया कि जिलाधिकारी इस कार्य को स्वयं देखेंगी। उन्होंने कहा कि रकबे की
पैमाइश अभी पूरी नहीं हुई है। यह आगे भी जारी रहेगी। कहा कि जितनी जल्दी हो
सकेगा वह टूटे हुए घाटों का निर्माण कराकर अतिक्रमण तथा कब्जे हटवाने का
प्रयास करेंगे।