फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जलालपुर गांव की प्राचीन धरोहरों को निहारते रह गए लोग

Wed, 13 May 2015 12:50 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
सदियों से जलालपुर गांव के बीहड़ में उपेक्षित पड़ी प्राचीन धरोहरों को संरक्षित करने की दिशा में अमर उजाला के महाभियान से शुरू हुई मुहिम ने लोगों में हलचल पैदा कर दी है। इस अभियान से लोगों का ध्यान इस ओर बंटने लगा है। इसे पर्यटन केंद्र बनाने की मांग लोग अब दमदारी से करने लगे हैं। लोगों का दावा है कि सोए प्रशासन व जनप्रतिनिधियों की नींद भगाकर अमर उजाला ने जो पहल शुरू की है। वह बड़ी ही सराहनीय है और इसके सुहाने नतीजे आज नहीं तो कल जरूर आएंगे। इस पर लोगों की प्रतिक्रियाएं समेटी है मनोज द्विवेदी/समरजीत सिंह की एक रिपोर्ट-
विज्ञापन


पुन: दोहराएंगे गौरवशाली इतिहास
बार संघ के अध्यक्ष रामसेवक सिंह यादव ने कहा कि अमर उजाला के इस महाभियान की जितनी सराहना की जाए उतनी कम है। यह गांव सदियों पुराना व्यवसायिक नगर रहा है। जिसके अतीत में यहां की बुलंदियों की गाथाएं जमींदोज हैं। पर्यटन विभाग की नजरें इनायत यदि इस क्षेत्र पर होती हैं तो जलालपुर गांव अपने गौरवशाली इतिहास को पुन: दोहरा सकता है। पर्यटन केंद्र बनने से तहसील क्षेत्र को नई सौगात मिलेगी। जो इस पिछड़े क्षेत्र के विकास के लिए मील का पत्थर साबित होगी। इसके लिए जन प्रतिनिधियों को आगे आने की जरूरत है।

बड़ी अद्भुत व दुर्लभ हैं धरोहरें
कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पन्नालाल राजपूत ने कहा कि जलालपुर गांव की प्राचीन धरोहरें बड़ी ही अद्भुत व दुर्लभ हैं। इस गांव को दूसरा काशी कहा जाए तो गलत नहीं है। बस उपेक्षा ने इस गांव को पीछे किया है। अमर उजाला की यह पहल इस क्षेत्र के लोगों को एक सौगात से कम नहीं है। जिसने यहां के इतिहास को उजागर कर सभी को जगा दिया है। सभी को संगठित होकर इसे पर्यटन केंद्र बनाने के लिए आगे आना होगा और आने वाले चुनाव में इसे क्षेत्र का मुद्दा भी बनाया जाएगा।
विज्ञापन


पर्यटन स्थल बनने से बढ़ेगा आय का स्रोत
मां महेश्वरी विकास समिति भेड़ी के अध्यक्ष अरुण द्विवेदी का कहना है कि जलालपुर का विकास पर्यटन केंद्र के रूप में होता है तो जिले के सबसे पिछड़े क्षेत्र के लोगों को बड़ा वरदान होगा। बेरोजगारी दूर होगी, लोगों के तथा खुद प्रशासन के आय का स्रोत बढ़ेगा। गांव के बीहड़ से जुड़ा बेतवा नदी पर पुल भी बना है। जिससेे कानपुर, लखनऊ व दिल्ली सहित विभिन्न महानगरों का आवागमन आसान है। लेकिन आज तक इस ओर किसी न तो सोचा और न ही पहल की। अमर उजाला की यह पहल आज नहीं तो कल जरूर रंग लाएगी।

अमर उजाला ने नई चेतना पैदा की
समाजसेवी अशोक सिंह का कहना है कि आज वह चार बार अमर उजाला पढ़ चुके हैं और इसके महाभियान की मुहिम ने उनके अंदर एक नई चेतना पैदा की है। यहां पर्यटन केंद्र बनाने की लड़ाई के लिए वह लोगों में जागरूकता लाने का प्रयास करेंगे। जनप्रतिनिधियों व प्रशासन से बराबर पत्राचार करेंगे तथा विभिन्न सामाजिक संगठनों से यहां के विकास के लिए आगे आने के लिए संपर्क भी करेंगे। यहां की प्राचीन धरोहरें उपेक्षा के कारण धीरे-धीरे नष्ट हो रही हैं। निजी स्वार्थो के चलते लोग इन्हें क्षति पहुंचा रहे हैं। लेकिन अब कुछ उम्मीद नजर आने लगी है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें