पौष्टिकता की दृष्टि से दूध प्राचीन काल से ही हमारे भोजन का एक विशिष्ट हिस्सा है। जिले में सफेद क्रांति लाने के तमाम प्रयास जारी है। फिलहाल दो वर्षों में अब तक सिर्फ एक किसान को कामधेनु मिनी डेयरी खोलने के लिए बैंक ने ऋण दिया है। वहीं सात अन्य किसानों के आवेदन बैंकों ने स्वीकृति किए हैं। वहीं देखा जाए तो 2013-14 में इस योजना में दो का लक्ष्य आया तो 10 किसानों का चयन किया गया। वहीं 2014-15 में जिले में 30 के लक्ष्य के सापेक्ष 32 का चयन हुआ।
जनपद में दुधारू पशुओं की कमी है। हालांकि देशी गायों की संख्या 2,59,487 है लेकिन इनमें सिर्फ 1282 शंकर प्रजाति की गायें हैं। वहीं 1,37,661 भैंसे हैं। अनुमान के मुताबिक जिले में कुल दूध का उत्पादन 669 लाख लीटर हो रहा है। जो आबादी को दृष्टिगत रख प्रति व्यक्ति 175 ग्राम हिस्से में आ रहा है।
जिले में सफेद क्रांति लाने को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से कामधेनु व मिनी कामधेनु डेयरी योजना संचालित करने के प्रयास बीते दो सालों से जारी हैं। पशुपालन विभाग इस योजना के जरिए किसानों लाभान्वित कर जनपद में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। शासन ने वर्ष 2013-14 में कामधेनु डेयरी में एक व मिनी कामधेनु डेयरी में दो का लक्ष्य जिले को दिया। जिसके सापेक्ष पशुपालन विभाग ने सात किसानों का चयन किया और संबंधित बैंकों को फाइलें भेजीं।
तब कामधेनु मिनी डेयरी में मौदहा तहसील के उरदना निवासी सूरजबली का चयन बैंक ने किया, लेकिन गारंटर की मौत होने से उसे दुग्ध डेयरी के लिए बैंक ने ऋण स्वीकृ त नहीं किया। तमाम बार दौड़ने के बाद इस किसान को दुग्ध उत्पादन के लिए मिनी कामधेनु डेयरी खोलने के लिए इलाहाबाद यूपी ग्रामीण बैंक शाखा मौदहा ने ऋण दिया।
फिलहाल लगातार हुए प्रयासों पर ले देकर 7 और आवेदनों पर ऋण स्वीकृति की मोहर लगाई गई है। फिलहाल इस योजना में 32 डेयरी खुलवाने का लक्ष्य पूरा नहीं हो पा रहा है। पशुपालन विभाग की मानें तो बीते शनिवार को मुख्यालय से आए डायरेक्टर आरपी सिंह ने बैंकर्स के साथ बैठककर इस योजना का अमलीजामा पहनाने की कोशिश की, लेकिन बैंकों की उदासीनता से यह काम जहां का तहां अटक गया है।
मुख्य पशुचिकित्साधिकारी डा.नेमीचंद ने कहा कि कामधेनु/मिनी कामधेनु डेयरी योजना के आवेदनों पर ऋण देने में बैंकें आनाकानी कर रहीं हैं। दो दिन पूर्व पशुपालन के डायरेक्टर ने बैंकर्स के साथ बैठक की पर कोई नतीजा नहीं निकला।
इलाहाबाद बैंक ही लाभार्थियों को ऋण देने का आश्वासन दे रहा है, जबकि एसबीआई कोई रुचि नहीं दिखा रही है। बैंकों की मनमानी के चलते मुख्यमंत्री की यह महत्वाकांक्षी योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। अभी तक सिर्फ उरदना के लाभार्थी को ही बैंक ने ऋण दिया है। इस पर काम भी शुरू कर दिया गया है।