जिले में डेंगू ने दस्तक दे दी है। कानपुर मेडिकल
कालेज में हुए आईजीएम टेस्ट में चार लोगों को डेंगू निकला है। इसे देखते
हुए जिला स्तर पर डेंगू की प्राथमिक जांच के लिए एलिजा किट शासन ने भेजी
हैं। वहीं मलेरिया विभाग का दावा है कि 8 महीनों में 60,986 स्लाइडों की
जांच हुई जिसमें 221 रोगी साधारण मलेरिया से ग्रसित मिले है। विभाग दावा कर
रहा है कि संसाधनों की कमी नहीं है। जागरूकता फैलाने के लिए जिले में
प्रधानों को पत्र के साथ पंपलेट भेजे हैं। नगर में तीन टीमें गठित की हैं
जो घर-घर जाकर इसके बचाव के तरीके लोगों को बता रही हैं।
कम
बारिश से मलेरिया विभाग की मुश्किलें कम हैं, लेकिन चिलचिलाती धूप के बीच
बढ़ी उमस से लोग बुखार की चपेट में आ रहे हैं। हालत यह है कि शायद ही कोई
ऐसा घर हो जहां लोग बुखार की चपेट में न आए हों।
देखा जाए तो मलेरिया विभाग
तब जागता है जब संबंधित गांव या शहर में कोई व्यक्ति को डेंगू या मलेरिया
बुखार की पुष्टि न हो जाए। ब्लाक कुरारा के मंगलपुर गांव में बीते दिनों एक
व्यक्ति की मौत होने पर विभाग हरकत में आया।
गांव जाकर फॉगिंग कराई। साथ
ही मुख्यालय और सुमेरपुर कस्बे में मैलाथियान टेक्निकल दवा की फॉगिंग कराई
गई। विभाग ने जिले के 68 गांवों में डीडीटी दवा का छिड़काव कराने का प्लान
तैयार किया है।
जिसमें 49 गांवों में 4565 किलो दवा छिड़की गई है। जबकि
जिले के अन्य नगरीय क्षेत्रों में लारवी साइडल दवा के छिड़काव के लिए
संबंधित निकायों के ईओ से डिमांड मांगी गई है। इतना सब होने के बावजूद
डेंगू जैसा खतरनाक बुखार से लोग ग्रसित हो रहे हैं।
कानपुर मेडिकल कालेज
में हुए आजीएम टेस्ट में सुमेरपुर कस्बे के धर्मेश्वरबाबा मोहल्ला निवासी
रामऔतार के लड़के नीरज (24) व रोहित (13) को डेंगू की पुष्टि हुई है। इलाज
के बाद यह पूर्णतया स्वस्थ बताए जा रहे हैं।
वहीं मौदहा ब्लाक के नरायच व
सुमेरपुर के सुरौली गांव में एक-एक डेंगू के मरीज पाए जाने की सूचना
मलेरिया विभाग को मिली है। जिला मलेरिया अधिकारी सत्यप्रकाश ने बताया कि
किसी भी तरह के वैक्टर जनित रोगों से बचाव के लिए पर्याप्त संसाधन हैं।
संभावित क्षेत्रों में डीडीटी दवा व लार्वा रोधक दवा तथा फॉगिंग कराई जा
रही है। डेंगू के चार मरीज निकले हैं। जिनकी केस हिस्ट्री प्राप्त हुई है।
वहां निरोधात्मक कार्रवाई हुई है। रोगी भी स्वस्थ होकर घर आ चुके हैं।