बैलों से खेती करना किसानों के लिए महंगा साबित हो रहा है। ऐसे में 90
फीसदी किसान किराए के ट्रैक्टरों से खेती बाड़ी कर रहे हैं। इसे देखते कृषि
विभाग भी फार्म मशीनरी बैंक को बढ़ावा दे रहा है। किसान समूहों का गठन
कराकर उन्हें फार्म मशीनरी बैंक के जरिए ट्रैक्टर से लेकर अन्य कृषि यंत्र
मुहैया कराए जा रहे हैं। पिछले वर्ष विभाग ने पांच किसान समूहों को
खेतीबाड़ी के लिए ट्रैक्टर समेत अन्य कृषि यंत्र उपलब्ध कराए, वहीं चालू
वित्तीय वर्ष में तीन किसान समूहों को इस सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन
योजना का लाभ दिया जाएगा।
बेमौसम बरसात के बीच बर्बाद हो रही फसलों से
किसानों की कमर टूट चुकी है। वहीं पुरानी पद्धति से खेती करना किसानों को
महंगा पड़ रहा है। धीरे-धीरे किसानों ने मशीनरी की ओर रुख कर लिया है।
गांवों में चुनिंदा किसानों के पास ही ट्रैक्टर हैं। जो पहले अपना कृषि
कार्य निपटाते हैं इसके बाद भाड़े से खेतों की जुताई करते हैं। साथ ही
जुताई बुआई करने पर मनमाना पैसा वसूलते हैं।
इसे देखते हुए किसानों की
समस्या का समाधान करने को शासन ने सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना
चालू की है।
इस योजना के तहत किसानों को समूह के जरिए ट्रैक्टर समेत सारे
कृषि यंत्र खरीदने के लिए शासन ने सहूलियत देनी शुरू कर दी है।
10 लाख
रुपये कीमत के कृषि यंत्र पर संबंधित चयनित कृषक समूह को 40 प्रतिशत यानी 4
लाख रुपये अनुदान दिया जा रहा है। 2014-15 में पांच कृषक समूह गठित
हुए जिन्हें बैंकों के जरिए ऋण दिलवाकर लाभान्वित किया गया है।
इससे
किसानों को खेतों की जुताई के लिए इधर उधर भटकना नहीं पड़ रहा है। बल्कि
आवश्यकतानुसार खेतों की जुताई बुआई के साथ थ्रेसरिंग कार्य और जमीन की
लेबलिंग जैसे अन्य कृषि कार्य सुगमता से होने लगे हैं।
इसे देखते हुए चालू
वित्तीय वर्ष में दो सामान्य व एक अनुसूचित जाति के कृषक समूहों को अनुदान
पर कृषि यंत्र मिलेंगे। इसको लेकर उपकृषि निदेशक ने कृषक समूहों से 15
अगस्त तक आवेदन मांगे हैं।
उपकृषि निदेशक चौधरी अरुण कुमार ने बताया कि
सबमिशन ऑन एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन योजना से किसानों के समूह बनवाकर
लाभान्वित किया जा रहा है। इससे समूहों के साथ गांव के किसानों का भला
होगा।
कम जोत के छोटे किसानों को ज्यादा फायदा मिलेगा। योजना के लिए कृषक
समूह बनाने के इच्छुक किसान उनके ब्लॉक स्तरीय कार्यालयों में भी जाकर
जानकारी लेने के साथ आवेदन फॉर्म जमा कर सकते हैं।
वर्ष 2014-15 में पांच
समूहों का गठन कर लाभान्वित किया गया है। इनके जरिए किसानों को लाभ मिलने
लगा है।