डार्क जोन हो रहे जिले को बचाने के किए जा रहे उपायों को अधिकारी तगड़ा
झटका दे रहे हैं। पानी रोकने के लिए करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं। इसके
बावजूद पानी रुक नहीं रहा है। जल संचयन की योजनाओं में चेकडैम का निर्माण
कराया गया है। लेकिन इनमें पानी नहीं टिक रहा है। इसके पीछे घटिया निर्माण
कराया जाना है।
ज्ञात हो कि जिले का अधिकांश हिस्सा डार्कजोन की
श्रेणी में पहुंच गया है। इसमें सुमेरपुर और सरीला विकासखंड को तो डार्कजोन
घोषित कर दिया गया है। वहीं मौदहा ब्लाक भी डार्क जोन की श्रेणी में है।
लगातार नीचे जा रहे भूगर्भ जलस्तर को ऊपर उठाने के लिए करोड़ों रुपये की
धनराशि पानी की तरह बहाई जा रही है।
लेकिन भूगर्भ जलस्तर बढ़ना तो दूर
कार्यदाई संस्था इसे नीचे गिरने से रोकने में नाकाम साबित हो रही है। लघु
सिंचाई विभाग चेकडैमों का निर्माण नदियों और नालों पर करा रहा है। वर्ष
2012-13 में 25 चेकडैम बनाए हैं। वहीं वर्ष 2013-14 में 27 चेकडैम का
निर्माण हुआ है। लेकिन चेकडैम का लाभ उठाने में किसान नाकाम हैं।
बीते
दिनों बारिश से नष्ट हुई फसलों का जायजा लेने मवइया गांव केंद्रीय टीम के
साथ जिलाधिकारी संध्या तिवारी भी पहुंची। इस बीच किसानों ने चेकडैमों के
निर्माण में धांधली किए जाने पर पानी न टिकने की शिकायत की, तब इन चेकडैमों
की जांच करने सीडीओ अवधेश बहादुर सिंह पहुंचे और किसानों की शिकायत सच
पाई।
चंद्रावल
नदी में ताज भट्ठे के पास वर्ष 2011-12 में चेकडैम का लघु सिंचाई विभाग ने
निर्माण कराया है। स्थलीय सत्यापन में पर पाया कि चेकडैम की क्रस्ट
क्षतिग्रस्त है। एक साइड की विंगवाल ध्वस्त है। वहीं दूसरी साइड की विंगवाल
की पिचिंग टूटी मिली। मौके पर चेकडैम सूखा मिला। टूटे चेकडैम से किसानों
को सिंचाई कराना तो दूर मवेशियों को भी पीने के पानी का इंतजाम नहीं है।
मौके पर इस परियोजना का कोई बोर्ड भी नहीं मिला।
लघु
सिंचाई विभाग ने हाइवे से बमुश्किल 100 मीटर दूर स्थित चंद्रावल नदी व
बडेरी नाला में बने दो चेकडैमों का निरीक्षण किया गया। एक चेकडैम नारायच और
मवइया गांव में विश्वनाथ यादव के खेत के पास मिला। वहीं सिचौलीपुरवा में
पप्पू खां के मकान के सामने चेकडैम में पाया कि क्रस्ट नाले की मुख्यधारा
में नहीं बनाई गई है। नहर का पानी ही भर पाता है। विंगवाल बरसात में बह
चुकी है। क्रस्टवाल की ऊपरी सतह टूटी है। चंद्रावल नदी में बने चेकडैम का
कंपेंशन कार्य अधोमानक होने से पिचिंग, पैरावेट दो जगह क्षतिग्रस्त मिली।
किसान इनसे सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। परियोजना का साइन बोर्ड भी नहीं
मिला।
सरीला
ब्लाक के भेड़ी डांडा में धुरौंदा नाले पर बीते जनवरी माह में 22 लाख कीमत
से चेकडैम बनाया गया है। लघु सिंचाई विभाग में चल रही भारी कमीशनबाजी का
आलम यह है कि क्रस्टवाल में मिट्टी भर देने से चटककर टूट गया। शिकायत के
बाद जिलाधिकारी ने जांच कराने के साथ नए सिरे से चेकडैम बनवाने के निर्देश
दिए लेकिन विभागीय अभियंता गुपचुप तरीके से इसकी मरम्मत कराने में जुट गए
हैं।