बीती रात से शुरू हुई बारिश अभी भी जारी है। बीच-बीच में तेज हवाओं के साथ
तेज बारिश से जहां पकी खड़ी लाही की फसल फैल रही है। वहीं गेहूं सहित अन्य
फसलें भी खेतों में फैली पड़ी हैं। सबसे अधिक क्षति एक दर्जन से अधिक ईंट
भट्ठों में पाथी गई ईंटों के नष्ट होने से हुई है।
दिसंबर माह से शुरू
हुई मौसम की गड़बड़ी के बीच मौसम ठीक होने से लोगों ने राहत की सांस ली थी।
शनिवार रात 12 बजे से तेज हवाओं व गरज के साथ हुई तूफानी बारिश से फसलों
को खासी क्षति हुई है। कल दिन में तो कुछ समय के लिए बारिश थमी रही। बीती
रात फिर से बिजली कड़की व तेज हवाओं के साथ बारिश फिर से शुरू हुई।
जो अभी
तक जारी है। इससे सड़कों में कई स्थानों पर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो
गई। गौरतलब हो कि इस क्षेत्र में ईंट-भट्ठे है। क्षेत्र के नरायच, छिरका,
मवइया, मदारपुर, छिमौली, सिजनौड़ा व पढ़ोरी गांवो में डेढ़ दर्जन से अधिक
ईंट-भट्ठे चल रहे है। दिसंबर माह में बारिश के झटके से कारोबार प्रभावित
हुआ।
तब मिट्टी की कच्ची ईंट को तैयार किया गया था। जिसकी भराई नहीं हो सकी
थी। उसके बाद मौसम साफ हुआ और पुर्न: इंट पथाई का कार्य शुरू हुआ।
चिमनियों में कच्ची ईंट भराई का कार्य शुरू होना था। लेकिन कल रात से शुरू
हुई बारिश ने इस कार्य में ब्रेक लगा दिया। वहीं बनाई गईं कच्ची ईंटें भी
बर्बाद हो गईं।
ईट भट्ठा उद्योग के अध्यक्ष आबाद अहमद तथा व्यापारी सगीर
अहमद, मनमोहन गुप्ता, अशोक गुप्ता, बाकर रंगा, बाबू भाई, वसीम अहमद आदि का
कहना है कि इस वर्ष भी ईंट का बेहद उत्पादन कम होगा। इनकी लाखों की क्षति
हुई है और ईट का दाम महंगा होगा। किसान कबीरूद्दीन, तिजवा निषाद सहित अन्य
किसानों ने बताया कि यह बारिश अब खेती के लिए बेहद नुकसान देय साबित हो रही
है।
लाही की फसलें कटने को तैयार खड़ी है, लेकिन तेज हवाएं चलने से यह
फैली पड़ी है। इसके साथ ही गेहूं की फसल भी फैल गई है। इतना ही नहीं मटर की
पकी फसल में फलियां है। वह भी गीली मिट्टी में दबकर पूरी तरह बर्बाद होने
लगी है। इस समय कोई भी ऐसी फसल नहीं है, जिसका इस बारिश से नुकसान न हो रहा
हो।