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सहकारी समितियों में नहीं मिल रहे खरीफ सीजन के बीज

Sun, 19 Jul 2015 12:02 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला/हमीरपुर
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किसानों को खाद-बीज और नकद धनराशि मुहैया कराने की सुविधा के लिए स्थापित सहकारी समितियां अपने मकसद में नाकाम हैं। जिले की 47 सहकारी समितियों में खरीफ सीजन के बीज उपलब्ध नहीं होने से इनसे जुड़े 91 हजार 847 किसान परेशान हैं। किसान तिल, मूंग, अरहर, उड़द, ज्वार, बाजरा, सोयाबीन जैसे बीजों के लिए खुले बाजार या फिर दूरदराज स्थित कृषि विभाग के केंद्रों में जाने को मोहताज हैं। जबकि इसी काम के लिए बनाई गईं समितियों से किसानों को ‘बीज नहीं है’ दो टूक जवाब मिल रहा है।
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किसानों को खाद और बीज की उपलब्धता कराने में सहकारिता विभाग का खासा योगदान रहा है। समितियां दो तरह से किसानों की मदद करती हैं। पहला, समितियों के जरिए किसानों को अंश (क) के तहत नकद धनराशि दी जाती है।

इससे वह खेती किसानी से जुड़ी अन्य जरूरतें पूरी करते हैं। जबकि अंश (ख) के तहत बुआई के लिए बीज और खाद की सुविधा मुहैया कराई जाती है। किंतु अब ऐसा नहीं है। समितियां अब सिर्फ खाद की बिक्री ही कर रही हैं।
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बीज की बिक्री यहां बंद कर दी गई है। जबकि इसी काम के लिए इन किसानों की अंश पूंजी के रूप में 4 करोड़ 8 लाख रुपये जमा हैं। यही वजह है खरीफ और रबी अभियान पर कर्ज के जरिए मिलने वाले बीज का टोटा बना रहता है। इस बार भी समितियों से बीज नदारद हैं।   

मुस्करा की साधन सहकारी समिति से ज्वार, अरहर, मूंग, तिल, उड़द एवं मूंगफली के बीज नहीं मिल रहे। किसान समिति के चक्कर लगा रहे हैं। परिणाम स्वरूप किसान गल्ला आढ़तियों से बीज खरीदने को विवश हैं।

समिति से मुस्करा, ऐंझी, बसवारी, चंदौरा, शिवनी, दामूपुरवा, मिहुंना गांवों के 676 किसान खाताधारक हैं। यहां यूरिया खाद का 12 टन से अधिक का भंडार है।

सचिव रहीस खां ने बताया कि ब्लाक के अंतर्गत संचालित साधन सहकारी समितियों मुस्करा, गुंदेला, गहरौली, इमिलिया, बिवांर, एवं रूरीपारा में खरीफ की फसल का बीज उपलब्ध नहीं है।

कहा किसान प्रमाणित बीज की मांग करता है और शासन द्वारा समितियों को प्रमाणित बीज उपलब्ध नहीं हो पाता है।
सुमेरपुर विकासखंड के पौथिया गांव स्थित किसान सेवा सहकारी समिति में ताला लटकता रहता है।

सचिव योगेश सिंह कहते हैं कि वह तो भरुआसुमेरपुर की समिति में तैनात हैं। इस समिति के साथ पचखुरा समिति को अतिरिक्त में देखना पड़ रहा है। समिति में सिर्फ खाद की बिक्री होती है।

बीज तो कई सालों से नहीं आया है। समिति से पौथिया, सहुरापुर, कुम्हऊपुर, सिकरी, उजनेड़ी, कलौलीजार, ललपुरा, भटपुरवा, महमूदपुर गांव शामिल हैं। मौजूदा समय में समिति पर हिस्सा जमा करने वालों की संख्या हजारों में है। समिति के गोदामों की स्थिति जर्जर है। इसीलिए खाद खराब होने के डर से नहीं मंगाई गई है।

प्रभारी एआर विजय कुमार शुक्ला ने कहा कि समितियों में केवल धान और गेहूं का बीज मंगाया जाता है। धान की डिमांड गोहांड और राठ समितियों पर कम मात्रा में रहती है, लेकिन इस बार डिमांड न होने से धान का बीज भी नहीं मंगाया है। अन्य बीज कृषि विभाग उपलब्ध कराता है।
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