भगवान की कृपा से ही उन्हें पाया जा सकता है। भगवान कृपा हम पर तभी होगी जब
हमारा अंत:करण शुद्ध होगा और माया का पर्दा हमारी आंखों में नही पड़ा
होगा। यह विचार रामलीला मैदान, भरुआसुमेरपुर में चल रहे राधाकृष्ण भक्ति
परक प्रवचन की श्रृंखला में सुश्री डा.कुंजेश्वरी ने व्यक्त किए।
उन्होंने
बताया कि ईश्वर की कृपा नहीं है तो हम चाहे जितने प्रयास करें, रामायण,
गीता, वेद पुराण, उपनिषद आदि धार्मिक ग्रंथ पढ़ डालें। किंतु भगवान को नहीं
जान सकते।
भगवान की खुद की कृपा से ही भगवान को हम जान पाएंगे। जानने के
बाद उन्हें मानने पर भी विश्वास करेंगे। उनका कहना था कि भगवान की कृपा से
ही अर्जुन को गीता का ज्ञान हो सका था। पूरी गीता सुनने के बाद श्रीकृष्ण
ने अर्जुन से यही प्रश्न किया था कि अर्जुन कुछ समझ में आया।
तब अर्जुन ने
कहा था कि प्रभु मेरा अज्ञान नष्ट हो गया है। किंतु यह सब आपकी कृपा से हुआ
है। इसी तरह हमें ईश्वर को पाने के लिए अंत:करण को निर्मल बनाना होगा।
तभी
भगवान की कृपा हम सब पर हो सकती है। इस अवसर पर बब्बू सिंह, शशिकांत
शुक्ला, अशोक गुप्ता, राकेश गुप्ता, लोटन गुप्ता आदि मौजूद रहे।