बुंदेलखंड पैकेज में बंदरबांट का एक और मामला प्रकाश
में आया है। योजना के तहत विकासखंड के तीन गांवाें के 18 गरीबों को रोजगार
मुहैया कराने के लिए दी गईं बकरियां किसी काम की नहीं हैं।
31 हजार
रुपये में खरीदी गई छह बकरियाें की कीमत 10-12 हजार रुपये से अधिक नहीं
है। इनमें से दो बकरियां तो आने के तीन-चार दिन बाद ही मर गईं, जबकि कई
बीमार हैं।
इतना ही नहीं छह के स्थान पर चार से पांच बकरियां हीं
दी र्गइं हैं। पशु चिकित्सा विभाग द्वारा अच्छे नस्ल की बताकर दुबली-पतली
बकरियां देने से लाभार्थी खफा हैं। इन्होंने जांच कराने की मांग की है।
बुंदेलखंड
पैकेज के तहत गरीब लोगों को रोजगार मुहैया कराने के मकसद से तीन गांवाें
के चयनित पांच-पांच लोगों को 6-6 बकरियां मुहैया करानी थी।
इसके
लिए पशु चिकित्सा विभाग और संबंधित बैंक के अधिकारियों ने प्रत्येक
लाभार्थी से 3100-3100 रुपये अंशदान जमा कराया, किंतु लाभार्थियों को बिना
जानकारी दिए पशु चिकित्सा विभाग ने मनमाने ढंग से बकरियां खरीद लीं। 21
अप्रैल की रात 10 से 12 बजे के बीच फत्तेपुर ग्राम सभा के मजरा काछिन डेरा व
मदारपुर में 5-5 लाभार्थियों को और गढ़ा गांव में आठ लाभार्थियों को
बकरियां दी गईं।
कई लाभार्थियों ने तो बकरियों की हालत देखकर लेने
से इंकार किया। आश्वासन दिया गया कि जो बकरियां मरेंगी, उनके स्थान पर
अच्छी बकरियां दी जाएगी। इस पर लोगों ने बकरियां ले लीं। सोना को छह
बकरियां मिलनी थीं, लेकिन उसे पांच बकरियां ही दी गईं। बहावउद्दीन, किशवरी
बानो और बिटोल को भी पांच-पांच बकरियां मिलीं, जबकि कासिमी को चार बकरियां
ही दीं।
उसने जब आपत्ति जताई तो पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों
ने कहा उसकी बकरियाें की संख्या पूरी कर दी जाएंगी, किंतु उसे शेष बकरियां
अभी नहीं मिलीं। अफसरों की इस हरकत से लोगों में नाराजगी है।