कलेक्ट्रेट परिसर के रानी लक्ष्मीबाई सभागार में
किसान दिवस आयोजित किया गया। डीएम संध्या तिवारी ने कहा कि अब ई पेमेंट से
किसानों को फसलों की राहत राशि दी जाएगी।
किसान अपने एकाउंट नंबर
संबंधित लेखपाल या तहसीलों में दे दें। कहा कि पीड़ित किसानों को अधिकतम दो
हेक्टेयर तक आर्थिक सहायता मिलेगी। उन्होंने गैर ऋणी किसानों के फसल बीमा
कराने संबंधी जानकारी ली गई। इस बीच मौदहा बांध की नहरों में की जा रही
सिल्ट सफाई की जांच कराने की मांग की गई।
डीएम ने कहा कि किसानों को
मुआवजा अब ई पेमेंट के जरिये दिया जाएगा। संबंधित किसान बैंक पासबुक के
पहले पेज की फोटो कापी तहसील में जमा करें। कहा कि केंद्र सरकार का पैसा
आएगा। इसी के बाद सूखा राहत का भी पैसा आना है।
भाकियू के संतोष
सिंह ने सहकारी बैंक महोबा में आए फसल बीमा क्लेम की धनराशि सहकारी
समितियों में भेजने की मांग की। किसान दिवस पर मौजूद इफ्को टोक्यो बीमा
कंपनी के अभिकर्ता रूपेश दीक्षित ने कहा कि बैंकों को खरीफ फसल का क्लेम
भेजा गया है।
डीएम ने फसलों में हुए नुकसान पर अफसोस जताते हुए कहा
कि हर किसान को फसल बीमा कराना चाहिए। इस पर गेहूं की फसल के प्रीमियम की
जानकारी पर अभिकर्ता ने प्रति हेक्टेयर 834 रुपये लगने की बात कही। बैंकों
पर गैर ऋणी किसानों का बीमा न करने पर डीएम ने कहा उनके टोल फ्री नंबर पर
किसान कॉल करें।
चिकासी से आए किसान रामपाल ने बीस साल से चल रही
चकबंदी प्रक्रिया के बारे में बताया। कहा कि एक किसान के चार से पांच चक
बनाए जा रहे हैं। इससे चकबंदी का मतलब ही खत्म हो जाएगा। चकबंदी से जुड़े
गांवों में राहत सूची पर किसानों ने सवाल उठाए।
टेढ़ा के किसान
हुम्मी ने कहा कि मूंग की फसल में पानी नहीं मिल रहा है। दस दिन से फीडर
बंद है। सरकारी बीज लेने के समय रसीद दिलाने की बात कही। बांकी निवासी
राजेंद्र सिंह ने नलकूप संख्या 123 से बालू निकलने की शिकायत दर्ज कराई।
बर्बाद
फसलों पर चलाए जाने वाले हार्वेस्टर में रीपर लगाने की मांग किसानों ने
की। इस मौके पर उप कृषि निदेशक चौधरी अरुण कुमार, भूमि संरक्षण अधिकारी कमल
कटियार, किसान नेता बलराम दादी, विजय पांडेय, सुशीलचंद्र शुक्ला सहित अन्य
किसान मौजूद रहे।