अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर।
जिला मुख्यालय से एक और निजी कंपनी निवेशकों का लाखों रुपया डकार कर फरार हो गई है। गांधी चौक स्थित कंपनी के दफ्तर पर अचानक ताला लटकने से सैकड़ों निवेशकों की धुकधुकी बढ़ गई है। कंपनी में 500 से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए थे। कंपनी कार्यालय पर ताला लटकने के बाद कंपनी अधिकारी निवेशकों की कॉल उठा रहे थे। वहीं निवेशकों को जल्द ही कार्यालय खोलने का आश्वासन दे रहे थे लेकिन अब कंपनी अधिकारियों ने मोबाइल स्विच ऑफ कर लिए हैं। गांधी चौक हमीरपुर में चल रहे एफडी और आरडी के लिए खोले निजी कंपनी कार्यालय पर ताला लटक गया है। कंपनी के अधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए हैं। ऐसे में आरडी जमा करवाने पहुंच रहे उपभोक्ताओं को कार्यालय पर ताला लटका देख वापस लौटना पड़ रहा है। हालांकि कंपनी में 500 से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए हैं। ऐसे में अचानक कंपनी कार्यालय में ताला लटकने से निवेशकों की धुकधुकी बढ़ गई है। कार्यालय पर ताला लटका देख निवेशकों ने कंपनी अधिकारियों से फोन पर संपर्क किया तो उन्होंने जल्द ही कार्यालय खोलने का आश्वासन दिया। अब कंपनी अधिकारियों के मोबाइल स्विच ऑफ हो गए हैं। ऐसे में निवेशक कंपनी के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं।
हैरत की बात है कि कंपनी ने बीते करीब दो साल से मैच्योर एफडी और आरडी का भुगतान भी उपभोक्ताओं को नहीं किया था। कोर्ट केस का हवाला देकर कंपनी अधिकारी उपभोक्ताओं को मैच्योरिटी देने से मना कर रहे थे लेकिन अब कंपनी कार्यालय बंद होने से उपभोक्ताओं को भी एफडी और आरडी की राशि डूबती नजर आ रही है।
एएसपी डॉ. शिव कुमार का कहना है कि पुलिस के पास इस बारे में अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं आई है। शिकायत मिलने पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दो कंपनियां लगा चुकी हैं लाखों की चपत
जिला मुख्यालय में 2016 में एफडी, आरडी और हेल्थ इंश्योरेंस का कारोबार करने वाली दो निजी कंपनियां लोगों का लाखों रुपये डकार फरार हो चुकी हैं। इनमें एक कंपनी का प्रदेश स्तरीय कार्यालय हमीरपुर में था। इसमें एक हजार से अधिक निवेशकों ने लाखों रुपये इन्वेस्ट किए थे। बाकायदा पुलिस थाना में कंपनी के फरार होने का मामला दर्ज है। हैरत यह है कि करीब दो दर्जन ऐसे निवेशक हैं जिन्होंने फरार हो चुकी तीनों कंपनियों में लाखों रुपये इन्वेस्ट किए हैं। दो कंपनियां फरार होने के बावजूद निवेशकों ने तीसरी कंपनी में लोगों से लाखों रुपये इन्वेस्ट करवाए थे।