हमीरपुर। करीब साढ़े 17 वर्ष पूर्व दलित युवक के साथ मारपीट के मामले में शनिवार को सुनवाई हुई। इस मामले में विशेष न्यायाधीश एससी-एसटी एक्ट राधेश्याम यादव की अदालत ने पांचों आरोपियों को दोषी पाते हुए चार वर्ष की कैद व प्रत्येक को तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है।
अपर जिला शासकीय अधिवक्ता राकेश कुमार यादव ने बताया सिसोलर थानाक्षेत्र के छानी गांव निवासी कमतू 14 जनवरी 2001 की सुबह करीब आठ बजे गांव के भइयालाल की दुकान के पास खड़ा था।
तभी नशे की हालत में जगदीश निषाद व बच्ची आरख आए और कमतू से कहा कि छानी गऊघाट के मेला में दुकान खरीदना है। जिस पर कमतू ने कहा कि दुकान खरीदना आसान नहीं है। इससे जगदीश व आरख नाराज हो गए और दोनों कमतू से गालीगलौज कर पिटाई करने लगे।
इस घटना के कुछ देर बाद रामपाल आरख व जगदीश कमतू को राजीनामा करने के लिए सुरेंद्र सिंह के दरवाजे के पास ले गए। जहां बच्ची, देवीचरन, लखन व लल्लू पहले से मौजूद थे। समझौता न होने पर उसके साथ दोबारा मारपीट की।
बीचबचाव करने कमतू का भाई रामचरन आया। जहां हमलावरों ने उसे भी मारपीट कर जानमाल की धमकी दी। घटना की रिपोर्ट कमतू ने सिसोलर थाने में दर्ज कराई थी।
शनिवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने पर विशेष न्यायाधीश एससी एसटी राधेश्याम यादव ने आरोपी जगदीश, बच्ची, रामपाल, लखन व लल्लू को दोषी पाए जाने पर चार-चार वर्ष कारावास व प्रत्येक को तीन-तीन हजार रुपये अर्थदंड सुनाया है। इस घटना के एक आरोपी देवीदीन आरख की मौत हो चुकी है।
जनवरी 2001 को छानी गांव में हुई थी घटना
अमर उजाला ब्यूरो