हमीरपुर। करीब पांच वर्ष पूर्व गर्भवती पत्नी को जलाकर मार डालने के मामले में बुधवार को अपर सत्र न्यायाधीश (एफटीसी प्रथम) ब्रह्मतेज चतुर्वेदी ने महिला के पति, सास व ससुर को दोषी पाया है। अदालत ने तीनों को 10 वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को जुर्माने की सजा सुनाई है।
अपर सत्र न्यायालय एफटीसी प्रथम के शासकीय अधिवक्ता आनंद कुमार सक्सेना ने बताया जालौन जिले के डकोर थानाक्षेत्र के गोरन निवासी मानिकचंद्र राजपूत ने अपनी पुत्री लक्ष्मी राजपूत की शादी राठ कोतवाली के धमना निवासी प्रदीप के साथ की थी। शादी में क्षमता के मुताबिक दहेज भी दिया।
मगर शादी के बाद ससुरालीजन लक्ष्मी से एक लाख रुपये व एक सोने की चेन की मांग कर उसका उत्पीड़न करने लगे। यह बात लक्ष्मी ने अपने परिजनों को बताई जिस पर उसके पिता ने लक्ष्मी के ससुराल जाकर ससुरालीजनों से मान मनौव्वल की। मगर ससुरालीजन नहीं माने और लक्ष्मी के साथ मारपीट करते रहे।
10 अगस्त 2013 को गर्भवती लक्ष्मी को मारापीटा और जला दिया। जिससे गर्भ में पल रहे सात माह के बच्चे व लक्ष्मी की मौत हो गई। बुधवार को मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायाधीश ने आरोपी पति प्रदीप, ससुर कढोरी लाल, सास सुशीला को दोषी पाते हुए 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास व प्रत्येक को आठ-आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पांच वर्ष पूर्व गर्भवती महिला को जलाकर मार डालने का मामला
अमर उजाला ब्यूरो