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महज 17 सेकेंड में मनरेगा योजना में हुआ 15 करोड़ का भुगतान

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भरुआसुमेरपुर। प्रदेश में मनरेगा में प्रशासनिक मद से बची धनराशि को सामग्री मद में स्थानांतरित करते ही रातोंरात जिले के दो ब्लाकों में महज 17 सेकेंड में 15 करोड़ का भुगतान हो गया। भुगतान की स्थिति को देखकर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। केंद्र व राज्य सरकार के आला अफसरों ने टीएसी जांच टीम का गठन कर रिपोर्ट तलब की है।
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मनरेगा योजना के तहत कराए गए कार्यों में सामग्री मद का भुगतान बीते नवंबर से नहीं हुआ था। बीते माह जारी हुए प्रशासनिक मद की धनराशि में भुगतान करने के बाद 49 करोड़ की धनराशि शेष बची थी। इस धनराशि को अधिकारियों ने सामग्री मद में 19 फरवरी को देर शाम परिवर्तित कर दिया और पूरे प्रदेश के हर ब्लाक में कुछ भुगतान करने के निर्देश दिए। लेकिन धनराशि आते ही 19 फरवरी की रात में महज 17 सेकेंड के अंदर जिले के सुमेरपुर एवं मौदहा विकासखंड में करीब 15 करोड़ का भुगतान कर लिया गया। 49 करोड़ में 15 करोड़ का सिर्फ दो ब्लाकों में भुगतान होते ही लखनऊ से लेकर दिल्ली तक हड़कंप मच गया। मौदहा विकासखंड क्षेत्र में करीब 12 करोड़ का भुगतान फर्मों को किया गया हैं। करीब तीन करोड़ का भुगतान सुमेरपुर ब्लाक में फर्मों में हुआ। भुगतान की स्थिति देख 20 फरवरी को ही शासन ने टीएसी जांच के आदेश पारित कर दिए।
शासन से आई टीएसी जांच टीम सोमवार से दोनों ब्लॉकों में भुगतान की स्थिति को खंगालने में जुटी है। अधिकारियों को आशंका है कि रातोंरात हुए भुगतान में कहीं कोई बड़ी खामी तो नहीं है। इस वजह से विकास कार्यों को मौके पर जाकर देखा जा रहा है। गौरतलब हो जिन कार्यों को भुगतान किया गया है उन कार्यों में ग्राम पंचायतों के साथ क्षेत्र पंचायतों की ओर से कराए गए मनरेगा योजना के पक्के कार्य भी शामिल हैं। टीएसी जांच टीम खंड विकास अधिकारियों एवं एपीओ मनरेगा से कराए गए कार्यों का ब्यौरा तलब किया है। परियोजना निदेशक चित्रसेन सिंह ने बताया जांच टीम को भुगतान किए गए कार्य व फर्में सही मिली है।
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