राठ। नगर में जलापूर्ति जल संस्थान के जिम्मे है। 67 साल पहले बने ओवरहेड टैंक से पानी की आपूर्ति की जाती है। जल स्तर गिरने से नलकूप जवाब दे रहे हैं। अंडरग्राउंड पाइप लाइन जर्जर हो चुकीं हैं। जिससे नगर में पेयजल व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है। आधा दर्जन से अधिक मोहल्लों में पानी नहीं पहुंच रहा है।
25 हजार की आबादी को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 1956 में पेयजल योजना स्थापित हुई थी। दो ओवरहेड टैंक व 11 नलकूप लगाने के साथ अंडरग्राउंड पाइप लाइन बिछाई गई। इस समय नगर की आबादी करीब डेढ़ लाख पहुंच गई। पेयजल आपूर्ति के लिए वही 67 साल पुरानी व्यवस्था है। अंडरग्राउंड पाइप लाइन गलने से जगह जगह रिसाव व ब्लाकेज आ गए। ओवर हेड टैंक जर्जर हो चुके हैं। हादसे की आशंका में इन्हें पूरा नहीं भरा जा सकता। टैंकों को भरने के लिए जल संस्थान के 14 नलकूप हैं। जिनमें से आधे रिबोर की हालत में हैं। एसडीएम कोर्ट के पास लगा जल निगम का नलकूप बीते ढाई साल से खराब है। चौपरा रोड मुगलपुरा में दो साल से पेयजल आपूर्ति ठप है। वहीं पठानपुरा, सिकंदरपुरा, गुलाबनगर सहित आधा दर्जन मोहल्लों में पेयजल संकट है। नगर पालिका के 6 व जल संस्थान के दो टैंकर व्यवस्था बनाने में नाकाम हैं। जल संस्थान के जेई बीपी सिंह ने कहा पेयजल योजना जर्जर हो चुकी है। सीमित संसाधनों से किसी तरह व्यवस्था बनाई जा रही है।
नगर में करीब 70 प्रतिशत भूभाग पर खारे पानी की समस्या है। हैंडपंप खारा व प्रदूषित पानी उगलते हैं। नगर की सीमा विस्तार होने से चारों ओर घनी आबादी हो गई है। नई बस्तियों में पाइप लाइन न होने से हैंडपंपों का ही सहारा है। खारा व प्रदूषित पानी पीने से लोग बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। चौपरा रोड निवासी प्रहलाद, प्रमोद, सुखलाल, हरिकिशन आदि ने बताया दो साल से जल संस्थान की पाइप लाइन सूखी पड़ी है। अधिकारी पानी देने में असमर्थता जताते हैं। बताया हैंडपंप का प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
लुधियातपुरा मोहल्ला निवासी चंद्रभान कुशवाहा बताते हैं कि कभी कभार नलों में पानी आता है। वह भी इतने कम समय के लिए कि आवश्यकता की पूर्ति नहीं हो पाती। पानी भरने के लिए रात भर जाग कर इंतजार करना पड़ता है।
गुलाबनगर मोहल्ला निवासी प्रकाश साहू कहते हैं एक दिन छोड़ कर पानी की आपूर्ति की जाती है। रात में पानी आने से लोगों की नींद खराब होती है। अधिकांश रात भर जागने के बाद भी पानी नहीं मिल पाता। दूर लगे हैंडपंप से पानी ढोना पड़ता है।