भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। शराब न लाने पर सजायाफ्ता हिस्ट्रीशीटर ने तमंचे की बट व डंडे से पीट-पीटकर दिव्यांग ई-रिक्शा चालक की हत्या कर दी। बुधवार सुबह उसका क्षत-विक्षत शव घर के सामने पड़ा मिला। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार कर लिया है।
सुमेरपुर थानाक्षेत्र के देवगांव निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि उसके बड़े भाई धर्मेंद्र उर्फ मुन्ना सिंह (52) ने करीब दो वर्ष पूर्व डेढ़ बीघे जमीन बेचकर ई-रिक्शा खरीदा था। इसी से वह परिवार का भरण पोषण करता था। दुर्घटना में टांग टूटने से दिव्यांग हो गया था। उसकी शादी भी नहीं हुई थी। मंगलवार रात करीब आठ बजे वह घर पहुंचा और ई-रिक्शा को दरवाजे पर चार्जिंग में लगा दिया। इसके बाद वह घर के सामने रहने वाले सजायाफ्ता गोविंद सिंह के साथ बैठकर शराब पीने लगा। शराब खत्म होने पर गोविंद ने धर्मेंद्र से शराब लाने को कहा। मना करने पर दोनों में विवाद हो गया। इस पर उसने भाई को तमंचे की बट व डंडे से पीटकर लहूलुहान कर दिया। सुबह दरवाजे पर भाई का क्षत-विक्षत शव देखा तो पुलिस को सूचना दी। थानाध्यक्ष रामआसरे सरोज ने मौके का जायजा लेने के बाद उच्चाधिकारियों को अवगत कराया। सदर सीओ राजेश कमल के साथ डॉग स्क्वायड व फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का बारीकी से जायजा लिया। सीओ ने बताया कि डंडे व किसी नुकीली चीज से हमला किया गया है। अधिक रक्तस्राव के कारण मौत हुई है। आरोपी थाने का हिस्ट्रीशीटर एवं सजायाफ्ता है। मौजूदा समय में हाईकोर्ट से जमानत पर बाहर था। दिव्यांग ई-रिक्शा चालक की हत्या करने के आरोपी के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज हैं। आरोपी थाने का हिस्ट्रीशीटर होने के साथ ही पूर्व प्रधानपति की हत्या के मामले में सजायाफ्ता है। जो हाईकोर्ट की अपील पर जमानत पर बाहर था।
हिस्ट्रीशीटर गोविंद सिंह गांव में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए वर्ष 2010 में प्रधानी चुनाव प्रचार के दौरान निवर्तमान प्रधान श्यामकली के पति रामजीवन पाल की हत्या कर दी थी। जिसमें उसे निचली अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। सजा होने पर गोविंद सिंह उच्च न्यायालय में अपील कर जमानत पर आया था। बीती रात वह अपने सामने रहने वाले पड़ोसी धर्मेंद्र सिंह उर्फ मुन्ना के साथ शराब पी रहा था। तभी उन दोनों का आपस में झगड़ा हो गया और उसने मुन्ना सिंह के सिर पर तमंचे की बट व डंडे से वार करके हत्या कर दी। थानाध्यक्ष रामआसरे सरोज ने बताया कि आरोपी के खिलाफ कुल 12 मामले दर्ज हैं। जिसमें हत्या, गुंडा एक्ट, आर्म्स एक्ट आदि शामिल हैं। थाने में चस्पा हिस्ट्रीशीटर सूची पर उसका 49 नंबर पर नाम दर्ज है।
सजायाफ्ता हिस्ट्रीशीटर गोबिंद सिंह ने वर्ष 2010 में पूर्व प्रधानपति रामजीवन पाल की हत्या करके गांव में दहशत व्याप्त कर दी थी। मामले में पांच आरोपी बनाए गए थे। जिसमें कोर्ट ने गोबिंद सिंह व लल्लू पाल को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जबकि तीन आरोपियों को सक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया था। जेल से जमानत पर बाहर आकर हिस्ट्रीशीटर ने वर्ष 2016 के पंचायती चुनाव में अपने भाई की पत्नी को प्रधानी का चुनाव लड़ाया था। जिसमें उसे जीत दिलवाई थी। वहीं वर्ष 2017-18 में कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सुनाने के बाद जेल चला गया। जो पिछले वर्ष दिसंबर 2022 में बाहर आया था।
पुलिस सजायाफ्ता व हिस्ट्रीशीटरों पर पैनी नजर नहीं रख रही है। जो जेल से छूटने के बाद अपराध को अंजाम देते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को ऐसे खूंखार अपराधियों पर नजर रखनी चाहिए। हर माह इनको थाने में बुलाकर इनका सत्यापन करते रहना चाहिए। इनकी हर गतिविधि की जानकारी रहने से ऐसी घटनाओं को होने से रोका जा सकता है। वहीं, सीओ राजेश कमल का कहना है कि हिस्ट्रीशीटरों की निगरानी की जा रही है।