फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hamirpur News: निजी अस्पतालों में जन्म... सरकारी एसएनसीयू का सहारा

विज्ञापन
विज्ञापन
फोटो 22 एचएएमपी 21- जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं का उपचार करते बालरोग विशेषज्ञ। संवाद
विज्ञापन

-सात माह में 534 नवजातों को किया गया भर्ती, 100 रेफर और 43 ने तोड़ा दम
-एसएनसीयू में भर्ती 20 प्रतिशत नवजात निजी अस्पतालों से रेफर होकर आते हैं
संवाद न्यूज एजेंसी
हमीरपुर। नवजात की हालत गंभीर होने पर परिजन सरकारी अस्पताल का दरवाजा खटखटा रहे हैं। जिला महिला अस्पताल की स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) के वार्षिक आंकड़े के अनुसार गंभीर नवजात शिशुओं के इलाज के लिए सरकारी अस्पताल ही सबसे बड़ा सहारा बना है। निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले शिशुओं को भी उपचार के लिए एसएनसीयू रेफर किया जा रहा है।
जिला महिला अस्पताल के एसएनसीयू में नवजात बच्चों का उपचार किया जाता है। बीते सात माह में कुल 534 नवजातों को भर्ती किया गया। इनमें 100 नवजातों को गंभीर हालत में कानपुर रेफर किया गया जबकि 43 की इलाज के दौरान मौत हो गईं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बीते दो माह में निजी अस्पतालों से कुल 32 नवजातों को गंभीर हालत में एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है।
विज्ञापन

विभाग के अनुसार, एसएनसीयू में भर्ती होने वाले करीब 20 प्रतिशत नवजात निजी अस्पतालों से रेफर होकर पहुंच रहे हैं जबकि 10 प्रतिशत बच्चों को लोग खुद ही लेकर पहुंचते हैं। करीब 30 प्रतिशत बच्चे एसएनसीयू में बाहर से पहुंच रहे हैं। बाकी 70 प्रतिशत नवजात बच्चे जिला महिला अस्पताल और अन्य सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों से भर्ती किए जाते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सुमित सचान के अनुसार, समय से पहले जन्म, कम वजन, सांस लेने में तकलीफ, संक्रमण, पीलिया और जन्मजात जटिलताओं से पीड़ित नवजातों को एसएनसीयू में भर्ती कर विशेषज्ञ निगरानी में इलाज दिया जाता है। डॉक्टर का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच, संतुलित आहार और सुरक्षित संस्थागत प्रसव से कई जटिलताओं से बचा जा सकता है।
विज्ञापन


बीते सात माह में भर्ती किए गए नवजात
माह - भर्ती - रेफर - मौत
जनवरी - 61 - 15 - 08
फरवरी - 63 - 12 - 05
मार्च - 81 - 09 - 07
अप्रैल - 47 - 15 - 06
मई - 82 - 12 - 02
जून - 118 - 21 - 12
जुलाई - 82 - 16 - 03

एसएनसीयू में क्यों आते नवजात
-पीलिया और संक्रमण।
-जन्मजात जटिलताएं।
-समय से पहले जन्म।
-कम वजन वाले नवजात।
-सांस लेने में परेशानी।

वर्जन:
गंभीर हालत वाले नवजातों का निशुल्क उपचार किया जाता है इसलिए निजी अस्पतालों से भी बड़ी संख्या में बच्चे यहां रेफर होकर आते हैं। अस्पताल में आधुनिक सुविधाएं और प्रशिक्षित चिकित्सकों की टीम उपलब्ध है। -डॉ. राजीव शाक्य, सीएमएस जिला महिला अस्पताल।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें