जिले में एक भी जेनरिक मेडिसिन स्टोर नहीं होने से लोग मेडिकल स्टोराें से महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर हैं।
सरकारी अस्पतालों में डाक्टरों की कमी से इलाज फार्मासिस्टों या लैब टेक्नीशियनों के भरोसे है। ज्यादातर अस्पतालों में खांसी जुकाम, बुखार की ही दवाएं उपलब्ध हैं। अन्य रोगाें में मरीजों को बाहर की दुकानाें से ही दवाएं खरीदने को मजबूर होना पड़ता है, जिससे मेडिकल स्टोरों पर ब्रांडेड दवाओं के नाम पर खूब खर्चा कराया जा रहा है। बताया जाता है कि इसमें चिकित्सकों की भी हिस्सेदारी होती है। इनके द्वारा लिखी गई दवाएं सभी मेडिकल स्टोराें पर उपलब्ध नहीं होती है। ये दवाएं चुनिंदा मेडिकल स्टोरों पर ही मिलती हैं। यदि उसी फार्मूले की दवा किसी अन्य दुकान से खरीद ली तो उसे डाक्टर वापस करवा देते हैं।
ज्यादातर मेडिकल स्टोराें में ब्रांडेड दवाओं के साथ जेनरिक दवाएं भी बेची जाती हैं, हालांकि लोगों को इनकी जानकारी नहीं होती है। वहीं इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा कभी कभार छापामारी कर महज औपचारिकता पूरी की जाती है।