हमीरपुर। दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए पात्र सालों से चक्कर काट रहे हैं। तीन बार हर सोमवार को लगने वाले दिव्यांग शिविर में भी आ चुके, लेकिन अभी तक प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। मजे की बात तो यह है कि मुख्यालय से 120 किलोमीटर दूर से चलकर दिव्यांग समय से शिविर पर पहुंच गए, लेकिन दोपहर 12 बजे तक कोई भी चिकित्सक दिव्यांग शिविर पर नहीं पहुंचे।
प्रत्येक सोमवार को सीएमओ कार्यालय के पीछे क्षय रोग अस्पताल के बगल में दिव्यांग शिविर का आयोजन किया जाता है। इस शिविर में हड्डी रोग विशेषज्ञ, ईएनटी व नेत्र चिकित्सक का पैनल बैठता है। सुबह 11 बजे से शिविर शुरू हो जाता है। सोमवार को दोपहर 12 बजे तक सभी चिकित्सक शिविर से नदारद मिले।मौके पर मौजूद स्वास्थ्य कर्मी धनंजय ने बताया कि सोमवार को कुल 14 आवेदनों में तीन को निरस्त किया गया है। आठ आवेदनों की जांच चल रही है। मौके पर तीन आवेदन सही पाए गए हैं।
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एक साल से प्रमाणपत्र बनवाने को परेशान
सुमेरपुर क्षेत्र के सुरौली बुजुर्ग गांव निवासी दिव्यांग रामगोपाल (72) कहते हैं कि एक साल से दिव्यांग प्रमाणपत्र बनवाने के लिए वह परेशान है। तीन बार बोर्ड कैंप में भी आ चुके हैं, लेकिन अभी तक प्रमाणपत्र नहीं बन सका है। 12 बजने को है और अभी तक कोई डॉक्टर भी नहीं आए।
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दूसरा प्रमाणपत्र बनवाने के लिए चौथी बार आई
शहर के नौबस्ता मोहल्ला निवासी दोनों पैरों से दिव्यांग बबली (42) ने बताया कि उसका दिव्यांग प्रमाणपत्र कहीं खो गया है। चार बार बोर्ड में आ चुकी, कोई सही जवाब ही नहीं देता। दूसरा प्रमाणपत्र बनवाने के लिए परेशान हूं।
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डेढ़ घंटे से डॉक्टरों का कर रही इंतजार
मौदहा क्षेत्र के रीवन गांव निवासी सावित्री (70) दोनों आंखों से दिव्यांग हैं। कहती हैं कि जानकारी होने पर बिटिया लेकर आई है। डेढ़ घंटे से बैठी हूं, बताया जा रहा है कि अभी कोई डॉक्टर नहीं आए हैं।
कोटविश्व एड्स दिवस कार्यक्रम के चलते चिकित्सकों को शिविर में पहुंचने पर विलंब हो गया है। शिविर में 14 आवेदन आए हैं। इनमें तीन आवेदन निरस्त किए गए हैं। शेष की जांच चल रही है।
- डॉ. गीतम सिंह, सीएमओ।