हमीरपुर। महिलाएं अपने खाली समय का सदुपयोग कर डाकघर की अभिकर्ता बन आत्मनिर्भर बन रहीं हैं। डाकघर की योजनाओं जैसे किसान विकास पत्र, आरडी आदि से जोड़ने का कार्य कर रही हैं। इससे 25 से 30 हजार रुपये प्रति माह वह कमा रही हैं।
महिला सशक्तीकरण और वित्तीय साक्षरता बढ़ाने के उद्देश्य से डाकघरों में महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना के तहत महिलाओं को अभिकर्ता (बीमा एजेंट) बनने का अवसर दिया गया। महिलाओं ने इस विकल्प को अपनाया। वह महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं। अपने तथा दूसरों के भविष्य को सुरक्षित किया। डाक विभाग की ओर से कहा गया है कि अभिकर्ताओं का कमीशन उनके काम के आधार पर तय होता है। अधिक खाता और आरडी खोलने पर हर महीने काफी अच्छा कमीशन ले सकती हैं।
पारिवारिक जिम्मेवारी के चलते बनीं अभिकर्ता
साल 2000 में बचत कार्यालय से जुड़कर अभिकर्ता बनी थीं। मां व भाई-बहन की जिम्मेदारी के चलते ये कार्य करना पड़ा। मौजूदा में 120 आरडी खाते चल रहे हैं। हर माह करीब आठ हजार रुपये कमीशन के रूप में मिल जाते हैं। महिलाएं इस सुविधा का फायदा उठा सकती हैं।
- नीलकमल राजपूत।
महीने में 25-30 हजार रुपये बनता कमीशन
डाक विभाग से यह अवसर मिलने से वह आत्मनिर्भर भी बन गई हैं। करीब 26 सालों से ये कार्य कर रही हैं। परिवार का पालन-पोषण भी अच्छे से हो जाता है। महीने में करीब 25-30 हजार रुपये कमीशन बन जाता है।
- नीता, गौरादेवी।
आरडी खुलवाने में मिलता चार फीसदी कमीशन
जिले भर में कुल 214 महिलाएं आरडी अभिकर्ता बनी हैं। ये डाकघर में लोगों की आरडी खुलवाकर हर माह कलेक्शन जमा कराती हैं। इससे उनको चार फीसदी कमीशन मिलता है। साथ ही महिलाओं को डाक विभाग की योजनाओं के बारे में बताकर उनसे जोड़ रही हैं।
- राजीव साहू, अपर बचत अधिकारी।
फोटो 03 एचएएमपी 03- नीलकमल राजपूत। संवाद