तहसील क्षेत्र के पाटनपुर गांव स्थित 200 वर्ष पुराना राधाकृष्ण मंदिर देखरेख के अभाव में जर्जर होता जा रहा है। वहीं इसी के पास बना तालाब भी कूड़ाघर में तब्दील होता नजर आ रहा है।
जिलाधिकारी द्वारा पाटनपुर गांव को गोद लेने के बाद ग्रामीणों को उम्मीद है कि दोनों प्राचीन धरोहरों का जल्द जीर्णोद्धार किया जाएगा।
पाटनपुर स्थित तालाब में स्नान करने के बाद लोग विशाल राधाकृष्ण मंदिर में भगवान राधाकृष्ण की पूजा करते थे। दूर-दूर तक ये धरोहरें आस्था की केंद्र थीं।
लेकिन समय गुजरने के साथ इनके रखरखाव पर लोगों ने ध्यान देना बंद कर दिया। हाल ये है कि तालाब सूख चुका है। गंदगी और काई इसकी बदहाली बता रही है। वहीं मंदिर जर्जर होता जा रहा है। संबंधित विभाग के ध्यान न देने से इसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
ग्रामीणों ने कई बार प्राचीन धरोहरों के संरक्षण की मांग की लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। अब डीएम संध्या तिवारी द्वारा पाटनपुर गांव को गोद लेने के बाद लोगों को एक बार फिर इनके कायाकल्प की आस जगी है। ग्रामीणों ने उनसे तालाब व मंदिर के सौंदर्यीकरण की मांग रखी है।
वहीं गांव खंडेह में भी दो विशाल मंदिर हैं। मंदिर से लगा पक्के घाटाें से बना तालाब भी है। लेकिन देखरेख के अभाव में ये भी बदहाल हैं।