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रोजगार सेवकों को न्यूनतम कार्य करना जरूरी

Tue, 01 May 2012 12:00 PM IST
Hamirpur
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हमीरपुर। पंचायतों में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों को निर्धारित मानदेय के अनुसार कार्य करना ही होगा। यदि ग्राम रोजगार सेवकों का औसत कार्य प्रदत्त मानदेय से कम पाया जाता है, तो साल भर की गणना के पश्चात रिकवरी की जाएगी। कहा जाए तो मनरेगा में मजदूरों को कार्य के अनुसार औसत दिहाड़ी के साथ ही रोजगार सेवकों को भी औसत कार्य करना ही होगा।
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इसके अलावा ग्राम रोजगार सेवकों को मनरेगा अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार कार्य को निर्धारित समय (टाइम बाउंड मैनर) में पूरा करना होगा। विभाग की ओर से इस संदर्भ में अधिसूचना जारी कर समस्त जिला परियोजना अधिकारी, खंड विकास अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं।
प्रदेश में 1050 ग्राम रोजगार सेवक कार्यरत हैं, जिन्हें तीन पंचायतों का एक वृत्त बनाकर मनरेगा कार्य के कार्यान्वयन का जिम्मा सौंपा गया है। इन्हें कार्य के बदले में 1800 रुपए प्रति माह मानदेय सर्विस फीस के रूप में दिया जाता है। यानी रोजगार सेवकों को प्रदत्त पंचायतों में औसतन 1.20 लाख रुपए का कार्य औसतन प्रति माह करवाना ही होगा। कम कार्य होने पर रिकवरी भरनी पड़ सकती है।
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उदाहरण के तौर पर ग्राम रोजगार सेवक को साल भर में 21600 रुपए का मानदेय प्रदान किया जाता है। यदि आवंटित पंचायतों में किए गए कार्य की राशि (1.5 प्रतिशत की दर से) प्रदत्त मानदेय से कम (माना 18000 रुपए) रहती है, तो अंतर के बराबर राशि (3160 रुपए) रोजगार सेवक से वापस ली जाएगी। इस संदर्भ में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण हमीरपुर के परियोजना अधिकारी अजीत भारद्वाज का कहना है कि ग्राम रोजगार सेवकों के लिए न्यूनतम कार्य निर्धारित किया गया है। सरकारी सेवा में कार्यरत कर्मचारियों, अधिकारियों के लिए भी जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए व्यवस्था लागू है, उसी अनुरूप यह व्यवस्था है।

रोजगार सेवकों के लिए अलग फंड बने
हमीरपुर। ग्राम रोजगार सेवक संघ के प्रदेशाध्यक्ष जगवीर सिंह ढटवालिया का कहना है कि रोजगार सेवकों को नाम मात्र का मानदेय मिलता है। उस पर नयी शर्त लगाना उचित नहीं है। उन्होंने व्यवस्था पर रोष जताया। उन्होंने मुख्यमंत्री से ठोस नीति बनाने, सम्मानजनक मानदेय प्रदान करने के लिए नीति बनाने की मांग की। ढटवालिया ने कहा कि प्रदेश में मनरेगा के तहत साल भर में खर्च होने वाले कुल बजट के डेढ़ प्रतिशत कमीशन के हिसाब से अलग फंड बनाया जाए, फंड में हर साल आठ से नौ करोड़ रुपए की राशि एकत्रित होगी। इस राशि से प्रदेश में कार्यरत ग्राम रोजगार सेवकों को सम्मानजनक मानदेय प्रदान किया जा सकता है।
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