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तबाही का आंकलन में जुटा राजस्व विभाग

Mon, 02 Sep 2013 05:35 AM IST
Hamirpur
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तबाही का आंकलन में जुटा राजस्व विभाग
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सरीला। भीषण बारिश से गिरे घर व फसलों की तबाही के आकंलन में राजस्व विभाग जुट गया है। लेखपालों को मकानों व फसलों की क्षति के आकंलन करने के निर्द ेश दिए गए हैं। समूचे तहसील क्षेत्र में चार सैकड़ा से अधिक कच्चे मकान गिरे हैं। जिसमें लोगों की गृहस्थी मलबे में दबकर बर्वाद हो गई। तहसीलदार डीएन गौतम व नायब तहसीलदार शैलेंद्र चौधरी ने रविवार को क्षेत्र के प्रभावित इलाकों का दौरा कर बताया कि बारिश से भारी से तबाही हुई है। इटैलिया में 50, अमूंद में 35, बीरा में 70, जमख्रुरी में 20, गोहांड में 70 व ममना में 45 कच्चे मकान गिरे हैं। खरीफ की फसलें अभी भी जलमग्न है। तहसीलदार ने बताया कि लेखपालो को ग्रामवार क्षति का आंकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि जिनके आशियाने पूरी तरह उजड़ गए हैं उन्हें गांव क प्राथमिक स्कूलों व पंचायत घरो में अस्थाई व्यवस्था कर ठहराया गया है।

अवरुद्ध मार्गों को चालू किया
सरीला। बारिश के बाद कटी सड़कों को दुरस्तकर आवागमन अब सामान्य कर दिया गया है। बीते दिनों हुई बारिश से कस्बे से राठ, उरई मार्ग की सड़क पानी के बहाव में कट गए थे। जिससे दो दिन तक आवागमन बंद रहा। बारिश के थमने के बाद मार्ग को दुरस्तकर आवागमन बहाल किया गया। राठ जलालपुर मार्ग में उमरिया गांव के नाले का पानी रपटे से नीचे है। गोहांड बीरा के बीच भी पानी से मार्ग कट गया था। चंडौत सड़क में तीन स्थानों में हुए कटाव को ग्रामीणों ने दुरस्त कर लिया। वाहनो का संचालन भी अब धीमे धीमे शुरु हो गया है।
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जलभराव से स्कूल जाना टेढ़ीखीर
कुरारा (हमीरपुर)। विकासखंड क्षेत्र के सरसई के पूर्व माध्यमिक व प्राथमिक विद्यालय, कुतुबपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय, खरौज के प्राथमिक विद्यालय व पूर्व माध्यमिक विद्यालय, परसी का डेरा का विद्यालय वही शंकरपुर में प्राथमिक विद्यालय सहित एक दर्जन से अधिक गांवों के विद्यालय परिसर तालाब नजर आ रहे हैं। परिसरो में घुटनों तक पानी भरा होने के चलते बच्चों को स्कूल के कक्षो तक पानी में घुसकर जाना पड़ता है। इसी तरह गांव के मजरा भैंसपुरा के प्राथमिक विद्यालय व आंगनबाडी़ केंद्र को जाने वाले रास्ते में भी पानी भरा है। सामाजिक कार्यकर्ता देवेंद्र गांधी ने बताया कि इन विद्यालयों में जल भराव की समस्या हर साल उत्पन्न होती है। विद्यालय परिसरो में मिट्टी की पुराई कराए जाने की जरूरत है।
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