मौदहा (हमीरपुर)। दहेज की मांग पूरी नहीं होने पर विवाहिता को घर से निकाल दिया गया। पुलिस ने मामला दर्ज नहीं किया तो पीड़िता ने अदालत की शरण ली। अब स्थित यह है कि अदालत के आदेश के बाद भी मामला दर्ज नहीं किया जा रहा है।
कसबा निवासी रोशनी नेअदालत में दिए प्रार्थना पत्र में कहा कि 24 नवंबर 2011 को उसकी शादी मप्र के जबलपुर जिले के शिहोरा निवासी शाहिद से हुई थी। शादी के बाद से ससुर हस्सू, सास बिटट्ी, जेठ मजीद, नंद रईसा, जेठानी शबनम, देवर वहीद व हमीद ने दहेज के लिए उत्पीड़ित करने लगे। उसे घर से निकाल दिया गया और वह मायके चली आई। फरवरी 2012 में पंचायत में ससुरालियों से समझौते के बाद दोबारा घर आ गई। बावजूद इसके उसका उत्पीड़न जारी रहा। यहां तक कि उसे जबरन मनमानी दवाएं देकर गर्भपात भी गिरवा दिया। जिससे वह बीमार हो गई तब उसने मायके वालों को सूचना देकर बुलवाया। उसने कहा कि वह अपने मायके में रह रही है और उसका मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाए। जिस पर न्यायालय के एसीजेएम द्वारा 1 जून को पुलिस को आदेशित किया गया कि वह इस मामले को दर्ज करें। हांलाकि अभी तक पुलिस ने इसे दर्ज नही किया। ब्यूरो