मझगवां थाने के इटकौर में 33 साल पहले हुई मारपीट के एक मामले मेें शुक्रवार का फैसला सुनाया गया। चार आरोपियों में से दो की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
शेष दो आरोपियों में से एक को सिविल जज की अदालत ने एक साल व दूसरे को चार माह की सजा सुनाई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामपाल सिंह एडवोकेट की अपील पर अदालत ने आरोपियों को अपील का टाइम देते हुए जमानत पर छोड़ दिया।
बीते 29 नवंबर 1984 को इटौरा गांव में मामूली बात को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था। इस मामले में एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। महिला के पति स्वामी प्रसाद ने थाने में जगत, भानसिंह, करन और महादेव के खिलाफ ईंट पत्थर व लाठी से मारकर घायल करने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
करीब 33 साल बाद सिविल जज मिलेंद कुमार की अदालत ने जगत को एक साल की सजा व एक हजार रुपये जुर्माना का आदेश सुनाया। अर्थदंड जमा न करने पर दो माह अतिरिक्त कारावास की सजा सुनाई।
इसी तरह से करन को चार माह और 750 रुपए जुर्माना जमा करने की सजा सुनाई गई। वहीं, अन्य आरोपी भानसिंह की मौत 12 साल और महादेव की मौत करीब 14 साल पहले हो चुकी है। बचाव पक्ष के अधिवक्ता रामपाल सिंह की अपील पर अदालत ने अपील का टाइम देते हुए जमानत पर छोड़ दिया।