पावर कारपोरेशन की लापरवाही का खामियाजा क्षेत्र के 100 गांवों के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री की 24 घंटे बिजली देने की घोषणा के बावजूद किसानों को आठ से दस घंटे ही बिजली मिल रही है। पलेवा के अभाव में जमीन परती पड़ी है। किसानों को सिर्फ आश्वासन ही दिया जा रहा है।
तहसील क्षेत्र के खेड़ाशिलाजीत और ममना पावर स्टेशन से कस्बा समेत 100 गांवों को बिजली आपूर्ति होती है। दोनों पावर स्टेशन राठ से आई 33 केवीए की एक लाइन से चलाए जा रहे हैं। ओवरलोड के कारण दोनों स्टेशनों के सभी फीडर एक साथ नहीं चल पाते। दो-दो फीडरों को चलाया जा रहा है।
क्षमता वृद्धि न होने का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। कस्बा और ग्रामीण क्षेत्रों को आठ से दस घंटे ही बिजली मिल रही है। इस पर भी फाल्ट मुसीबत बने हैं। गौरतलब है कि ममना पावर सबस्टेशन के लिए अलग से 33 केवीए लाइन बिछाने के लिए पावर कारपोरेशन को दो साल पहले बजट मिल चुका है। लेकिन लापरवाही का आलम ये है कि अधिकारी सिर्फ आश्वासन देकर चुप बैठ जाते हैं। दो साल से लाइन अधूरी पड़ी है।
किसानों की सुनवाई नहीं
कस्बा निवासी किसान अवधेश मिश्रा, निरंजन सोनी, छिबौली गांव के पन्नालाल, मलिक राजपूत, खेड़ा के बीरेंद्र कुमार, पवई के महेंद्र सिंह, शशिकांत, जरिया के सुख सागर, अवधेश आदि ने बताया कि खेत परती पड़े हैं। लेकिन किसानों की कोई सुन नहीं रहा, अकाल जैसे हालात हैं।
जब तक दोनों पावर स्टेशनों के ट्रांसफार्मरों की क्षमता नहीं बढ़ती और ममना पावर स्टेशन की अलग से 33 केवीए की लाइन नहीं बनती, समस्या का समाधान नहीं हो सकता। दोनों पावर स्टेशनों में दस-दस केवीए का एक-एक ट्रांसफार्मर और लगाने का स्टीमेट बनाकर भेजा गया है।
एसपी मिश्रा, अवर अभियंता