अमर उजाला ब्यूरो
हमीरपुर। जिला मुख्यालय हमीरपुर में प्रदेश सरकार ने दिव्यांग बच्चों के लिए मॉडल स्कूल तो खोल दिया है, लेकिन स्कूल में स्टाफ की व्यवस्था करना भूल गई है। प्रदेश सरकार ने राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला बाल हमीरपुर के भवन में इसी वर्ष अप्रैल माह में मॉडल स्कूल फॉर इनक्लूसिव एजूकेशन फॉर डिसेबल्ड स्टूडेंट्स (एमएसआईईडीएस) खोला है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत खुले इस स्कूल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ कक्षा में बिठाकर शिक्षा प्रदान करना है ताकि दिव्यांग बच्चे अपने आप को शेष बच्चों से अलग न समझें। दिव्यांग बच्चों के प्रति समाज में भेदभाव की भावना पैदा न हो।
इस अभियान के तहत हमीरपुर बाल स्कूल में खोले गए मॉडल स्कूल में 20 बच्चों का दाखिला भी हो चुका है। शिक्षा विभाग की ओर से किए गए प्रचार प्रसार से प्रेरित होकर अभिभावकों ने अपने बच्चों का इस स्कूल में दाखिला तो करवा दिया है, लेकिन स्कूल में स्टाफ न होने से अब मायूस हैं। नए खुले इस स्कूल में दो टीजीटी अध्यापक और दो पीजीटी अध्यापकों की व्यवस्था का प्रावधान था। लेकिन ढाई माह के बाद भी स्टाफ की व्यवस्था नहीं हो पाई है। गलोड़ स्कूल से एक अध्यापक को डेपुटेशन पर हमीरपुर स्कूल भेजा गया है। जो इन बच्चों की देखरेख और शिक्षा प्रदान कर रही हैं। इसके अलावा न तो स्कूल में कोई हेल्पर है और न ही अन्य मूलभूत सुविधाएं। यहां तक हॉस्टल की सुविधा तक नहीं है। जिससे 20 से 22 किलोमीटर दूर से आने वाले बच्चों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ बच्चे तो चलने फिरने में पूरी तरह असमर्थ हैं। जिसके चलते अभिभावक परेशान हैं।
इन कक्षाओं में बच्चों की संख्या
छठी कक्षा में 5 बच्चे, सातवीं में 2, आठवीं में 1, नौंवी में 4, दसवीं में 2, जमा एक में 2 और जमा दो में 4 विद्यार्थियों ने दाखिला लिया है। इसमें 10 बच्चे मानसिक रूप से अक्षम हैं। इसके अलावा कुछ सुनने और कुछ बोलने में तो कुछ देखने में अक्षम हैं।
इस साल से हमीरपुर स्कूल में दिव्यांग बच्चों के लिए स्कूल खोला गया है। स्टाफ और हॉस्टल के लिए मामला प्रदेश सरकार के समक्ष उठाया गया है।
-जगदीश कौशल, प्रिंसिपल, डाइट गौना करौर।