सूखे से प्रभावित किसानों ने जुगाड़ लगाकर जो फसलें बोई थीं, वो भी ओलावृष्टि में तबाह हो गईं। राजस्व विभाग के अनुसार तहसील क्षेत्र के 3738 किसानों की फसलें बर्बाद हुई हैं। ओलावृष्टि से 10996 हेक्टेयर फसल जमींदोज हो गई। इन किसानों के लिए 4.65 करोड़ रुपये सहायता राशि मांगी गई है।
तहसील क्षेत्र में 14 मार्च को जमकर ओलावृष्टि हुई थी। इसमें किसानों का भारी नुकसान हुआ। तहसीलदार राकेश कुमार मौर्य ने बताया कि गेहूं, मटर, चना, लाही, मसूर आदि फसलों को ओलावृष्टि से हुई क्षति का आंकलन राजस्व विभाग ने किया है। बताया कि 3738 किसानों को क्षति हुई है। इसमें 1996 ऐसे किसान हैं, जिनका 33 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ है। इसमें 112 हेक्टेयर असिंचित भूमि में बोई गई फसलें हैं। जबकि 10884 हेक्टेयर सिंचित भूमि की क्षति है।
लघु और सीमांत कृषक सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। उनकी संख्या 2852 है। इनमें वृहद कृषक 886 हैं। इसमें असिंचित 205 हेक्टेयर और सिंचित 1400 हेक्टेयर है। इनमें कुल किसानों की संख्या 3738 है। उन्होंने बताया कि लघु और सीमांत कृषकों को क्षतिपूर्ति के लिए 2.62 करोड़ और बड़े किसानों के लिए 2.03 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी गई है। तहसीलदार ने बताया कि बीते वर्षों में हुई फसलों की क्षति पर किसानों को दैवी आपदा के तहत अभी तक 51.40 करोड़ रुपये वितरित किए जा चुके हैं।