मुस्करा थानाक्षेत्र के बसवारी गांव में करीब दस वर्ष पूर्व हत्या के मामले में न्यायालय ने आरोपी भतीजे को दस वर्ष सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। जबकि साक्ष्य न मिलने पर इस मामले में आरोपी बनाई गई युवती को बरी कर दिया है।
मामले की पैरवी कर रहे सहायक शासकीय अधिवक्ता देव सिंह यादव ने बताया कि बीते 22 अप्रैल 2006 की शाम सात बजे बसवारी गांव निवासी गयादीन की पत्नी शंाति देवी व उसके बड़े भाई की पुत्र वधू नम्रता के बीच घरेलू विवाद हो गया। तभी मौके पर नम्रता का पति संतोष कुमार तमंचा लेकर पहुंच गया और शांति देवी पर तानकर गाली गलौज करने लगा। तभी तमंचे से फायर हो गया। गोली सीधे शांति देवी के सीने में लगी। जिससे वह घायल होकर गिर पड़ीं।
वहीं, मौके पर वाद विवाद में बीच बचाव कर रहे घायल के बेटे जितेंद्र व बेटी सुनीता उसे इलाज के लिए मुस्करा सीएचसी ले गए। जहां से चिकित्सकों ने उसे सदर अस्पताल रेफर कर दिया। सदर अस्पताल पहुंचते उसकी मौत हो गई। जिस पर मृतका के पति ने मुस्करा थाने में अपने भतीजे संतोष कुमार और उसकी पत्नी नम्रता के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कराया। गुरुवार को मामले की सुनवाई करते हुए अपर सत्र न्यायाधीश कोर्ट नं. एक दीपा जैन ने अभियुक्त संतोष कुमार को दस वर्ष का सश्रम कारावास व 20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। जबकि साक्ष्य न मिलने पर नम्रता को बरी कर दिया है।