विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में भू जलस्तर आठ से 10 मीटर खिसकने से 2718 हैंडपंपों में से एक तिहाई पानी नहीं दे रहे। 200 से अधिक हैंडपंप रिबोर की स्थिति में है। हाल ये है कि गांवों में 80 से 110 फीट बोरिंग वाले हैंडपंप दगा देने लगे हैं। जबकि जल निगम के पास मात्र 12 हैंडपंपोें के ही रिबोर की सूचना है।
मकरांव गांव में जलस्तर 10.70 मीटर नीचे खिसक गया है। प्रधान बलराम प्रजापति ने बताया कि गांव में 46 हैंडपंप हैं। खारा पानी देने और ठप होने पर 35 हैंडपंपों के पाइप बढ़ाए गए। फिर भी हैंडपंप संचालित नहीं हो पा रहे। जूनियर हाईस्कूल में लगे हैंडपंप को विकासखंड अधिकारी श्यामसुंदर विश्वकर्मा ने चलवा कर देखा। इसमें कीचड़युक्त पानी रुक-रुक कर आ रहा था। इसे रिबोर कराने के लिए जल निगम से कहा गया है।
क्षेत्र के पारा गांव के प्रधान कमलेश कुमार ने बताया कि उसके गांव में 30 हैंडपंप ठप हैं। जिन्हें पाइप बढ़ाकर ठीक कराया गया है। उन्होंने कहा कि इनमें से पांच हैंडपंपों में नए क्रिस्टल डलवाए गए हैं।
बिगहना प्रधान फहीम खां ने बताया कि उनके यहां 60 हैंडपंप हैं। 38 हैंडपंपों में दो-दो पाइप डालकर इन्हें संचालित करा दिया गया। जो हैंडपंप रिबोर होने की दशा में हैं, उनकी सूची जलनिगम को भेजी है।
छानी गांव के प्रधान प्रतिनिधि घनश्याम निषाद ने कहा कि गांव में 36 हैंडपंप हैं। 15 हैंडपंपों में पाइप बढ़ाए गए। वहीं गांव के एक मोहल्ले के लोग अभी भी खारा पानी पीने को मजबूर हैं। कुनहेटा गांव में 60 में 25 हैंडपंप, बिहरका में 55 में 45 हैंडपंप, गुरदहा में 45 में 40 हैंडपंप में दो से तीन पाइप बढ़ाए गए।
पाइप देने से इंकार
प्रधानों ने गांवों में पानी मुहैया कराने के लिए कुछ हैंडपंपों में पाइप बढ़वाए। खास बात ये है कि पाइप लाइनें और अन्य हैंडपंप सामग्री जिन फर्मों से खरीदी गई। उनकी उधारी ही लगभग तीस लाख के आसपास होने पर अब इन आपूर्तिकर्ताओं ने सामग्री देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
बीडीओ श्यामसुंदर विश्वकर्मा ने बताया कि पंचायतों के खातों में राज्य वित्त और 14वें वित्त का धन भेज दिया गया है। खाते संचालित करने के आदेश हैं। सचिव से धन निकाल कर पेयजल जैसे आवश्यक कार्य को प्राथमिकता के आधार पर कराने को कहा है।
विकासखंड क्षेत्र में तैनात जल निगम के अवर अभियंता रामरतन ने बताया कि अब तक 3500 हैंडपंप स्थापित हो चुके हैं। उनके पास 12 हैंडपंपों के पूरी तरह ठप होने की सूची है। जबकि 112 हैंडपंप रिबोर की स्थिति में है। भूमिगत जलस्तर आठ से दस मीटर नीचे जाने से हैंडपंप रिबोर किए जा रहे हैं।