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गोरक्षपीठाधीश्वर ने की महानिशा की पूजा

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गोरखनाथ मंदिर में नाथ सम्प्रदाय की परम्परा के अनुसार अष्टमी के दिन महानिशा की पूजा करते गोरक्षप?
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गोरक्षपीठाधीश्वर ने की महानिशा की पूजा
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गोरखपुर। शारदीय नवरात्रि के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में चल रहे पूजा के क्रम में शनिवार को सप्तमी पर मां कालरात्रि का पूजन किया गया। मंदिर के मुख्य पुजारी कमलनाथ ने विधिवत आरती की। नाथ पंथ की परम्परा के अनुसार हवन एवं महानिशा पूजा रात्रि में अष्टमी होने पर होती है। सांय काल अष्टमी लगने से निशा पूजा दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ व हवन के साथ संपन्न हुआ।
निशा पूजा में पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने गौरी गणेश पूजन, वरूण पूजन, पीठ पूजन, यंत्र पूजन, स्थापित मां दुर्गा का पूजन, राम-लक्ष्मण, सीता का षोडषोपचार पूजन, कृष्ण एवं गो माता का पूजन, नवग्रह पूजन, विल्व अधिष्ठात्री पूजन, शस्त्र पूजन, द्वादस ज्योर्तिलिंग पूजन, अर्धनारीश्वर एवं शिव शक्ति पूजन किया। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ हुआ। बेदी पर जमेें जौ के पौधों को पीठाधीश्वर एवं आचार्यगण द्वारा वैदिक मंत्रों के बीच काटा गया।
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इसके बाद हवन वेदी पर ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र तथा अग्नि देवता का आह्वान और पूजन किया गया। दुर्गा सप्तशती के संपूर्ण पाठ के साथ हवन किया गया। सात्विक बलि के रूप में नारियल, गन्ना, केला, जायफर आदि का बलि देकर शक्ति आराधना का कार्य संपन्न हुआ। अंत में आरती एवं क्षमा याचना के बाद प्रसाद का वितरण किया गया।
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कन्या पूजन 7 को
गोरखनाथ मंदिर में 7 अक्टूबर को नवमी के दिन कन्या पूजन का कार्यक्रम होगा। उस दिन पीठाधीश्वर कन्या पूजन करेंगे। कन्याओं का पांव अपने हाथ से पखारेंगें। उनको भोजन कराएंगे तथा दक्षिणा देकर सभी को विदा करेंगे। अगले दिन दशमी को तिलकोत्सव का कार्यक्रम होगा। भक्त उन्हेें तिलक लगाएंगे। शस्त्र पूजा के बाद दोपहर बाद मंदिर से जुलूस निकलेगा। इसमें पीठाधीश्वर अपने पारम्परिक वेशभूषा मेें एक रथ पर सवार होकर चलेंगे। वह मानसरोवर मंदिर जाकर भगवान शिव की पूजा करेंगे। इसके बाद वह रामलीला मैदान जाएंगे जहां भगवान राम का राज्याभिषेक करेंगे।
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