अक्षय तृतीया पर तनिष्क शोरूम में खरीददारी करतीं महिलाएं।
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अक्षय तृतीया का पर्व सोमवार को शहर में श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में मनाया गया। अक्षय शुभ की कामना के साथ लोग सराफा बाजार पहुंचे और आभूषणों की खरीदारी की। हालांकि बाजार पर लगन का मुहूर्त न होने का पूरा असर दिखा। लोगों ने छोटे-छोटे आभूषण खरीदकर पर्व की मान्यता पूरी की।
यूं तो आभूषण खरीदने का सिलसिला पूरे दिन चला लेकिन खरीदारी का शुभ मुहूर्त यानी स्थिर लग्न दोपहर 12 बजकर 10 मिनट से दो बजकर 24 मिनट तक ही था। इसलिए इस मुहूर्त में आभूषणों की खरीदारी का सिलसिला अपेक्षाकृत तेज रहा। स्वर्ण व्यवसायियों के मुताबिक वैवाहिक लग्न न होने के चलते ज्यादातर लोगों ने अक्षय तृतीया पर आभूषणों की खरीदारी की महज कोटापूर्ति ही की। ऐसे में अधिकांश लोगों की खरीदारी 10 से 30 हजार के बीच ही सिमट कर रह गई।
एक व्यवसायी ने बताया कि यह अंदेशा पहले से था, इसलिए भारी के बजाय हल्के आभूषण पर ही जोर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सर्वाधिक बिक्री कील, झुमका, स्वास्तिक और देवी-देवताओं के लॉकेट की रही।