वृद्ध महिला का घर, तस्वीर (इनसेट में)
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खुद साठ वर्ष की वृद्धा, पति वर्षों से लकवाग्रस्त होकर बिस्तर पर पड़े, घर में गरीबी इतनी की दो वक्त की रोटी जुटाने के लिए दो बेटों को विदेश में हाड़ तोड़ मेहनत करनी पड़ रही। वहीं दो वर्ष पहले छोटी बेटी की असामयिक मौत हो गई। इतने पर भी वह कांपते हाथों से पति की सेवा और घर परिवार की देखभाल कर रहीं थीं।
लेकिन, गांववालों के रोजाना ही ‘टोनहिन’ (तंत्र-मंत्र करने वाली महिला) कह कर पुकारे जाने से वह इस कदर टूट गईं कि शनिवार सुबह उन्होंने कांपते हाथों से केरोसिन भरा डब्बा उठाया और खुद पर उड़ेल कर आग लगा ली। बहू ने उन्हें जलता देखा तो शोर मचाकर आसपास वालों को बुलाया। उन्हें सीएचसी ले जाया गया, जहां हालत गंभीर देख मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहां वह जीवन-मौत से संघर्ष कर रही हैं।
दिल को दहला देने वाली यह घटना हुई धनघटा थाना क्षेत्र के कर्मा गांव में। जहां 60 वर्षीय सरस्वती देवी वर्षों से बिस्तर पर पड़े अपने लकवाग्रस्त पति अक्षयवर चौधरी की सेवा में लगी रहती थीं। उनके तीन बेटे और दो बेटियां थीं। दो साल पहले छोटी बेटी की मौत हो गई। दो बेटे राजेश और राजकुमार घर में गरीबी के कारण विदेश में जाकर कमा रहे हैं। वह छोटे बेटे राहुल और उसकी पत्नी तथा राजकुमार की पत्नी रंगीता के साथ रहती हैं।
रंगिता ने बताया कि सुबह करीब 8:30 बजे वह खाना बना रही थी। इस दौरान बरामदे में शोर सुनाई दिया। बाहर निकली तो देखा सास आग की लपटों से घिरीं चीख रही थीं। यह देख उसने शोर मचाया तो परिवार और गांव के लोग आ गए और आग की लपटों को बुझाकर उन्हें मलौली सीएचसी ले गए। डॉक्टर ने उन्हें 90 फीसदी तक झुलसा देख तुरंत मेडिकल कॉलेज ले जाने की सलाह दी।
महिला ने डॉक्टर सुनील कुमार को बताया कि गांव के लोग उसे ‘टोनहिन’ कहकर पुकारते हैं। ऐसे ताने रोज-रोज सुनकर वह तंग आ चुकी थी, इसलिए उसने जीवन खत्म करने के लिए ठान ली और शरीर पर केरोसिन डालकर आग लगा ली। हालांकि ग्राम प्रधान निजामुद्दीन उर्फ गुड्डू खान व अन्य ग्रामीणों का कहना है कि महिला की मानसिक हालत सही नहीं है। वह पहले भी लोगों के बारे में कुछ इस तरह की बातें कह चुकी है।
एसओ करुणाकर पांडेय का कहना है कि घटना की सूचना मिलने के बाद सरस्वती देवी का बयान दर्ज करने के लिए सब इंस्पेक्टर को भेजा गया है। बयान और परिजनों की सूचना के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।