रेलवे संरक्षा संवाद में मौजूद डीआरएम विजय लक्ष्मी कौशिक
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मेरे पति लोको पायलट हैं। उनकी रोज ड्यूटी लगी रहती है। बच्चे को टीका लगवाना है। कई दिन से छुट्टी का इंतजार कर रही हूं। बताइए, बच्चे को टीका लगवाना जरूरी है कि नहीं। ऐसी नौकरी किस काम की, जब घर पर समय ही न दे पाएं।
लोको पायलट परवेज आलम की पत्नी शमा परवीन का यह दर्द बुधवार को रेलवे सीएमएस लॉबी में आयोजित संरक्षा संवाद में डीआरएम लखनऊ के सामने छलक उठा। कार्यक्रम में 50 से अधिक लोको पायलट, गार्ड और उनकी पत्नियां मौजूद थीं। डीआरएम विजय लक्ष्मी कौशिक ने उनकी पत्नियों के सवाल सुने और जवाब देकर उन्हें संतुष्ट करने की कोशिश की। हालांकि कई तीखे सवालों का उनके पास जवाब नहीं था।
अधिकांश की पत्नियों ने पति को छु़ट्टी न मिलने की शिकायत की। डीआरएम का कहना था कि लोको पायलट व गार्ड की नौकरी की तुलना सिर्फ बॉर्डर पर तैनात सेना के जवानों से की जा सकती है। साथ ही उन्होंने यह कहकर आश्वस्त किया कि इन समस्याओं का जल्द समाधान किया जाएगा।