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क्या सीएम का शहर, पीएम के शहर से जुड़ पाएगा

Sun, 19 Mar 2017 01:53 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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आदित्यनाथ - फोटो : amar ujala
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केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद जिले में विकास की इबारत लिखने के लिए अनेक परियाजनाओं का शिलान्यास हुआ। उसी में एक प्रधानमंत्री के शहर से भावी मुख्यमंत्री के शहर को जोड़ने वाली गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन का कार्य भी है। इसके शिलान्यास के नौ महीने बाद भी कार्य नहीं शुरू हो पाया है। यह सड़क आदित्यनाथ की प्राथमिकताओं में से एक है। इसके अलावा भी कई ठप पड़ी परियोजनाएं विकास की राह देख रही हैं।
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देश या प्रदेश में किसी की भी सरकार रही हो महंत आदित्यनाथ गोरखपुर के विकास के लिए संसद से लेकर सड़क तक अपनी आवाज बुलंद करते रहे। जबसे केंद्र में भाजपा की सरकार बनी उन्होंने अनेक परियोजनाओं का शिलान्यास कराया, पर वह कार्य रफ्तार नहीं पकड़ सके। इसके पीछे भाजपा नेता प्रदेश सरकार की ओर से अड़ंगेबाजी को दोष देते रहे। 2500 करोड़ की गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन परियोजना के लिए सरकार की तरफ से किसानों को मुआवजा देने के लिए धन दे दिया गया है। बावजूद इसके अब तक किसानों का मुआवजा नहीं बटा। जो कार्य दिसंबर में शुरू होना था, अब तक नहीं शुरू हो पाया। इस प्रोजेक्ट के लिए महंत लगातार संघर्ष करते रहे। अब यह देखना है कि वह किस तरह से इसको आगे बढ़ाते हैं।

इसी तरह से कालेसर जंगल कौड़िया बाईपास का कार्य भी नहीं शुरू हो पाया। यह परियोजना भी महंत की महत्वाकांक्षी परियोजना है। इसके साथ ही एम्स की जमीन अब तक पूरी ट्रांसफर नहीं हो पाई है। पूर्वांचल के सांसदों के साथ महंत ने पीएम से मिल कर इसे स्वीकृत कराया था। फर्टिलाइजर का कार्य भी अभी तेजी नहीं पकड़ पाया है। गीडा में गैस बाटलिंग प्लांट का कार्य भी अभी गति नहीं पकड़ पाया। इसके अतिरिक्त अन्य कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं यहां ठप या सुस्त पड़ी हैं। इनको पूरा कराना नए सीएम की प्राथमिकता होगी। 
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