गोला बाजार के बारानगर सरयू नहर नुआव गांव के पास सोमवार की रात टूट गई जिससे कई एकड़ फसल जलमग्न हो गई। यहां तक कि गांव की दलित बस्ती के कई घरों में पानी घूस गया। ग्रामीणों ने किसी प्रकार तख्त लगाकर और बोरी में मिट्टी भरकर पानी तो रोक दिया, लेकिन फसल डूबने से किसानों के अरमानों पर नहर ने फिर पानी फेर दिया। किसान इस नुकसान से काफी मर्माहत हैं। वे इसे नहर विभाग की लापरवाही मान रहे हैं। सूचना देने के बाद भी मौके पर किसी अधिकारी के न आने से लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
तहसील क्षेत्र के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए बारानगर से बड़हलगंज के भेड़ी ताल तक नहर निकाली गई है। सोमवार की रात नहर नुआव गांव के पास टूट गई। गांव वालों को जैसे ही जानकारी हुई वे नहर को बांधने पहुंच गए। पहले तो तख्त आदि लगाकर पानी को रोकने का काफी प्रयास किया गया, लेकिन पानी नहीं रुका तब लोगों की सूचना पर नहर विभाग ने पंप को बंद करा दिया जिससे पानी का बहाव काफी कम हो गया।
गांव वालों ने मंगलवार की सुबह बोरी में मिट्टी भरकर पानी रोक दिया, लेकिन तब तक करीब पचास एकड़ रोपी गई धान की फसल डूब गई। जिन किसानों की फसल डूबी है उनमें जयनारायन, हरिशंकर गुप्ता, दीप नारायन, पिंटू राय, विंद्रावन, गोपाल, पिंटू कन्नौजिया, चंद्रदेव, राजेन्द्र, राजनाथ सहित अन्य शामिल हैं। इनका कहना है कि कई किसानों ने तो एक से दो दिन पहले ही रोपाई की थी।
हर वर्ष टूटने से मचती है तबाही
28 जून को चंदौली गांव के पास नहर टूटने से कई एकड़ फसल बर्बाद हो गई थी। पिछले वर्ष भी इसी सीजन में बनकटा के पास नहर टूटने से फसल बर्बाद होने के साथ-साथ लोगों के घरों में भी पानी पहुंच गया था जिससे काफी नुकसान हुआ था। प्रत्येक वर्ष कहीं न कहीं नहर जरूर टूटती है। किसानों का आरोप है कि जब पानी की सख्त जरूरत होती है तब नहर में पानी नहीं रहता और जब बरसात होती है तो नहर ओवरफ्लो होकर बहती है।
कई बार कर चुके हैं ठीक कराने की मांग
गांव के किसान हरिशंकर गुप्ता, सुरदापार के डॉ. वीके राय, श्यामलाल यादव, अनिल मिश्र, अजय राजभर, विनोद तिवारी आदि का कहना है कि पिछले वर्ष तहसील दिवस पर किसानों ने पहुंच कर नहर को ठीक करने की मांग की थी। तब थोड़ी बहुत सफाई आदि कराई गई थी। इससे पूर्व भी इसे ठीक कराने की मांग कई बार की जा चुकी है।
जर्जर है नहर
प्रत्येक वर्ष नहर की मरम्मत के नाम पर काफी धन खर्च होता है फिर भी उसकी स्थिति जस की तस बनी रहती है जिससे हर सीजन में किसानों को इसका खामियाजा भुगतान पड़ता है।
नहर टूटी थी जिसे ठीक करा दिया गया है। नहर कहीं जर्जर नहीं है। लोग नहर काटकर खेतों में पानी ले जाते हैं और उसे ठीक नहीं करते जिससे यह समस्या आ रही है। लोगों को कई बार हिदायत भी दी जा चुकी है।
- राजेश कुमार, जेई, बारानगर सरयू कैनाल