फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

वाटर पार्क का अनुबंध निरस्त करने का फैसला हाईकोर्ट से खारिज

Tue, 10 Dec 2019 12:11 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
विज्ञापन
water park - फोटो : demo
विज्ञापन
शहर के 14 साल पुराने वाटर पार्क नीर निकुंज के मामले में गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) को बड़ा झटका लगा है। पार्क के साझेदारों और प्राधिकरण के बीच हुए अनुबंध को निरस्त करने के जीडीए उपाध्यक्ष ए. दिनेश कुमार के आठ नवंबर के आदेश को ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद कर दिया है। हाईकोर्ट ने उपाध्यक्ष को फिर से इस मामले में वाटर पार्क के साझेदारों का पक्ष सुनने और उसके बाद ही कोई निर्णय करने का आदेश दिया है। उधर, प्राधिकरण ने अब साझेदारों को उनका पक्ष रखने के लिए नोटिस जारी करने की तैयारी शुरू कर दी है।
विज्ञापन


जीडीए उपाध्यक्ष द्वारा पार्क का अनुबंध निरस्त करने के खिलाफ साझेदारों ने मेसर्स केआर एम्यूजमेंट एंड रिसोर्ट्स की तरफ से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। इसपर जस्टिस शशिकांत गुप्ता और जस्टिस पीयूष अग्रवाल ने छह दिसंबर को सुनवाई की। दो सदस्यीय पीठ ने जो फैसला सुनाया, उसे सोमवार को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया। फैसले के मुताबिक वाटर पार्क के साझेदारों का पक्ष सुने बिना इस तरह की कार्रवाई को न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता है। इसलिए जीडीए उपाध्यक्ष के फैसले को निरस्त किया जाता है।

दरअसल, चंपा देवी पार्क में स्थित वाटर पार्क को लेकर प्राधिकरण और मेसर्स केआर एम्यूजमेंट एंड रिसोर्ट्स के बीच 28 अक्तूबर 2005 को करार हुआ था। इस करार से संबंधित पूरक करार 19 अक्तूबर 2007 को हुआ था। चंपा देवी पार्क को लेकर अनुबंध की शर्तों का साझेदारों द्वारा उल्लंघन करने का दावा करते हुए जीडीए उपाध्यक्ष ने दोनों करार को निरस्त कर दिया।
विज्ञापन


अनुबंध निरस्त करने के आदेश में कहा गया था कि पार्क जीडीए की संपत्ति है। इसका संचालन करने वालों का अस्तित्व सिर्फ कस्टोडियन के रूप में है। करार का मकसद पार्क का समुचित रखरखाव, वाटर पार्क एवं इन्वायरमेंटल पार्क को विकसित करना था। मगर अनुबंध की शर्तें तोड़कर वहां पांच विवाह घर संचालित किए जा रहे थे। अनुबंध में पार्क का एक एकड़ हिस्सा सार्वजनिक लोगों के लिए छोड़ने को कहा गया था। वहां पाथ-वे बनाना था। मगर उस हिस्से पर भी बाउंड्रीवाल करा लिया गया। सभी गेटों पर सिक्योरिटी गार्ड बैठा दिए गए जिससे आम आदमी पार्क के भीतर पहुंच ही नहीं पाता।
विज्ञापन

रजिस्ट्री कार्यालय से भी निरस्त हो चुकी है डीड

आठ नवंबर 2019 को अनुबंध निरस्त करने के साथ ही 13 नवंबर को साझेदार रोहित अग्रवाल और प्राधिकरण से नामित सचिव राम सिंह गौतम ने कलेक्ट्रेट स्थित रजिस्ट्री दफ्तर पहुंचकर वाटर पार्क के रजिस्टर्ड डीड को भी निरस्त कर दिया। इसे लेकर भी बाकी साझेदार आरोप लगा रहे हैं कि रोहित सिर्फ दो फीसदी के पार्टनर हैं। ऐसे में उन्हें कोई अधिकार नहीं था रजिस्टर्ड डीड निरस्त करने का।

वाटर पार्क: साल भर खेल जैसा रोमांच
वाटर पार्क के मामले को लेकर साल भर खेल जैसा रोमांच बना रहा। आरोपों के दौर चले। पहले साझेदार और जीडीए के बीच मामला गरमाया। फिर साझेदारों के बीच खुद तलवार खिंच गई। एक दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए गए। एक ने बदनाम करने का गंभीर आरोप लगाया, तो दूसरे ने उन्हें निरूपमा रॉय के जैसा कलाकार बताते हुए मुंबई जाने तक की नसीहत दे डाली। साल 2019 शुरू होने के साथ ही वाटर पार्क का मामला भी वजूद में आया। प्राधिकरण ने नीर निकुंज वाटर पार्क में अवैध तरीके से विवाह घर संचालित करने के आरोप में फरवरी में उसे सील कर दिया था। बाद में साझेदारों सील तोड़ दी।

इसपर प्राधिकरण ने मार्च 2019 में उनपर मुकदमा भी दर्ज करा दिया । साझेदारों ने प्रेस कांफ्रेंस कर जीडीए अफसरों पर गंभीर आरोप लगाए। सीलबंदी की कार्रवाई के खिलाफ साझेदार कमिश्नर कोर्ट भी गए। जीडीए ने आठ नवंबर को पार्क का अनुबंध निरस्त कर दिया। फिर 13 नवंबर को रजिस्टर्ड डीड भी खारिज हो गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें