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तहरीर और तकरीर दोनों में माहिर थे वीरेन : अनंत मिश्र

Thu, 07 Jan 2016 02:47 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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गोरखपुर। जनचेतना के कवि वीरेन डंगवाल को श्रद्धांजलि देने के लिए बुधवार को आकाशवाणी के स्टूडियो में एक परिचर्चा का आयोजन हुआ। ‘वीरेन डंगवाल : कुछ यादें, कुछ बातें’ विषय पर हुई इस परिचर्चा में साहित्यकार प्रो. अनंत मिश्र ने उन्हें तहरीर और तकरीर दोनों विधा में माहिर शख्सियत करार दिया। प्रो. मिश्र ने कहा कि वीरेन की कविताओं पर बोलने की बहुत गुंजाइश नहीं रह जाती, ऐसे में वह चुप रहने के लिए मजबूर करती है।
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वीरेन की कविताओं पर अपने नजरिए को मजबूती देने के लिए प्रो. मिश्र ने ओशो के उस संदेश की याद दिलाई, जिसमें मौन रहने की परिस्थितियों की शिनाख्त की गई थी। उन्होंने ‘रामसिंह’ शीर्षक वाली कविता की चर्चा करते हुए कहा कि वीरेन ने रामसिंह के हवाले से दुनिया के मौजूदा हाल और उसमें आम, मेहनतकश और निर्दोष इंसानों के हाल ख़ाका खींचा है। कहा कि उनकी कविताओं को सहीं संदर्भों में समझने की ज़रूरत है, जो यकीनन काफी बड़े और जीवन के इंसानी पक्ष को मजबूत करने वाले हैं। आज़मगढ़ से आए पकंज गौतम ने निराला पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान वीरेन डंगवाल से मुलाकात को याद करते हुए अपनी बात की शुरुआत की। उन्होंने समकालीन कविता में संवाद की ज़रूरत पर अपने एक लेख के हवाले से वीरेन डंगवाल के कृतित्व और उनके व्यक्तित्व की ख़ूबियों को रेखांकित किया। ‘जलेबी’ कविता का पाठ करते हुए उन्होंने कहा कि इस कविता में बेधक व्यंग है। उन्होंने कहा कि वीरेन की कविताओं में प्रतिवाद है, जो यथार्थ की जमीन पर टिका है।
कवि श्रीधर मिश्र ने कहा कि वीरेन न केवल कविताएं गढ़ते थे बल्कि हर कविता में संघर्ष के मोर्चों पर वह खुद खड़े हुए दिखते हैं। अपने शिल्प की सादगी और भाषा विधान से वह खुद को कबीर की परंपरा से जोड़ते हैं। कवियित्री अनीता अग्रवाल ने कहा कि वीरेन की कविताएं समय में हस्तक्षेप करने वाली और सच कहने का साहस सिखाने वाली हैं। परिचर्चा का संचालन करते हुए आकाशवाणी के कार्यक्रम प्रमुख डॉ. अरविंद त्रिपाठी ने वीरेन डंगवाल को आत्मीयता से याद किया। कई संस्मरण भी सुनाए। कहन के उनके कौशल पर चर्चा करते हुए कहा कि वीरेन जी में साहित्य को लेकर कोई महत्वाकांक्षा नहीं थी, लेकिन जीवन को लेकर वह भरपूर महत्वाकांक्षी रहे। उनके इस मकसद की छवि उनके मक्खी, जलेबी, समोसा, तोप, पपीता, हाथी सरीखी कविताओं में मिलती है। मामूली समझी जाने वाली चीजों की उपमा से उन्होंने गैरमामूली कविताएं रचीं। इस दौरान वीरेन डंगवाल की मशहूर कविताओं का पाठ भी किया गया।
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