विधानसभा की आश्वासन समिति के सामने गोरखपुर यूनिवर्सिटी ने साफ किया है कि पूर्व में सेवारत रहे मानदेय शिक्षकों का विनियमितीकरण संभव नहीं। पक्ष की मजबूती के लिए यूनिवर्सिटी ने राज्यपाल, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछले सालों में किए गए फैसले का सहारा लिया। समिति को यूनिवर्सिटी ने यह भी बताया कि वर्तमान में यूनिवर्सिटी प्रशासन के सामने यह प्रकरण विचाराधीन स्थिति में भी नहीं है।
आश्वासन समिति ने मामले में यूनिवर्सिटी को पक्ष रखने के लिए शुक्रवार का दिन तय किया था। तय समय पर कुलपति प्रो. अशोक कुमार समिति के सामने उपस्थित हुए और साक्ष्य के साथ यूनिवर्सिटी का पक्ष रखा। समिति ने 2012 के पर्चा आउट प्रकरण में की जा रही कार्रवाई को लेकर भी यूनिवर्सिटी से सवाल किया, जिसके जवाब में कुलपति ने अब तक हुई कार्रवाई का सिलसिलेवार ब्यौरा प्रस्तुत किया। कुलपति ने समिति को आश्वस्त किया कि सीबीसीआईडी की जांच रिपोर्ट में जो लोग दोषी मिले हैं, उन पर जल्द कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि इस विषय में जांच के लिए सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई है, जो अगले तीन महीने में रिपोर्ट देगी। उस आधार पर कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी। कुलपति ने आश्वस्त किया कि कार्रवाई के बाद इसकी जानकारी समिति को दे दी जाएगी।