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वेलेंटाइन डे : सिर्फ युवाओं का नहीं रहा यह उत्सव

Sun, 14 Feb 2016 01:49 AM IST
गोरखपुर। अमर उजाला ब्यूरो
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त्याग और निस्वार्थ भाव की ऊंचाइयों पर जाकर किसी के लिए जीना, भावनाओं का एक-दूसरे में मिलना और फिर मानसिक रूप से एक-दूसरे में समा जाना सच्चे प्रेम का सफर है। हालांकि, बदले सामाजिक परिवेश में प्रेम को नए सिरे से परिभाषित करने की जद्दोजहद जारी है। लेकिन पिछले एक दशक से प्रेम के इजहार की माध्यमों का व्यवसाय कर रहे नजरिया इसे लेकर साफ है। उनका कहना है कि प्रेम के पर्व के रूप में जाना जाने वाला वेलेंटाइन-डे उत्सव अब महज युवाओं का नहीं रहा, बल्कि इसकी पैठ घर-परिवार तक पहुंच चुकी है। व्यवसायियों का यह नजरिया उनके लंबे अनुभव का नतीजा है।
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बलदेवा प्लाजा में लंबे समय से कार्ड और उपहार का व्यवसाय कर रहे मनीष साहनी का कहना है कि शुरुआती दौर में उनकी दुकान पर इस अवसर पर सिर्फ युवाओं की भीड़ होती थी लेकिन पिछले कुछ वर्षों से हर आयु वर्ग के लोगों की दस्तक होने लगी है। लोग अपने परिवार के सदस्यों के लिए उपहार और कार्ड खरीदने लगे हैं। इस आधार पर मैं पक्के तौर पर कह सकता हूं कि यह पर्व परिवारों के बीच भी पहुंच गया है। हालांकि मनीष ने इस बात से इत्तेफाक किया कि वाट्सएप और फेसबुक जैसे सोशल नेटवर्किंग ने कार्ड की बिक्री कम कर दी है। अब तो कार्ड उपहार के साथ के लिए खरीदे जा रहे हैं। फूल व्यवसायी समीर राय मनीष के नजरिये पर एक और कदम आगे गए। उन्होंने कहा कि अब ऑफिसों में भी इस अवसर पर उपहार दिए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस बार वेलेंटाइन-डे रविवार को पड़ने के चलते फूल और उपहार का व्यवसाय मंदा ही रहेगा। क्योंकि जहां इस दिन स्कूल बंद रहेंगे, वहीं ऑफिस की भी छुट्टियां रहेंगी।

दिलों को जोड़ने का माध्यम है प्रेम
प्रेम शब्द की अभिव्यक्ति का इतना विस्तार है कि जब भी उसे किसी सीमा या बंधन में बांधने का प्रयास किया गया है, भ्रम की स्थितियां बनी हैं। इसकी परिभाषा अपने भीतर इतनी संभावनाएं संजोए हुए हैं कि इसका मूल्यांकन हो ही नहीं सकता। यदि हम पति-पत्नी, मां-बाप, भाई-बहन, माता-पिता और संतान, दो दोस्तों के बीच संबंधों की मजबूत स्थिति का अहसास करें तो प्रेम के अर्थ को समझने की जरूरत ही नहीं रह जाएगी। यही वजह है इस इस दिन को मैं अपने परिवार और सहयोगियों के साथ मातृ-पितृ दिवस के रूप में मनाती हूं।
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-सीमा सिंह, प्रधानाचार्य, कालिन्दी पब्लिक स्कूल

जीवन जीने का अर्थ है प्रेम
साधारण अर्थ में शारीरिक और लौकिक प्रेम को ही प्रेम का प्रतीक माना जाता है। लेकिन यह इसकी संकुचित परिभाषा है। दरअसल, लौकिक प्रेम जितना ही सतही है, उसकी जड़ें उतनी ही गहरी हैं। प्रेम की गहराई पर बहस नहीं बल्कि मंथन करने की जरूरत है। इसे लेकर सक्रियता और समर्पण से जुड़ा मंथन ही इसकी गहराइयों का अहसास करा सकता है। यह अहसास प्रेम के किसी आयाम में हो सकता है, चाहे वह प्रेमी-प्रेमिका का हो, पारिवारिक और सामाजिक रिश्तों का या फिर पशु-पक्षियों से प्रेम का। जरूरत इसे समझने की है।
-प्रो. सतीश कुमार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज

पूरे परिवार को दूंगी उपहार
जब से समझ हुई, तबसे इस त्योहार के मायने लोगों को समझाने में लगी हूं। इसकी शुरुआत परिवार से ही की है। कोशिश होती है कि इस दिन परिवार के सभी सदस्यों को उपहार दूं। यही कोशिश इस बार भी है। इसे लेकर खरीदारी भी कर ली है।
-विनीता सिंह, बेतियाहाता

दोस्तों में बाटूंगा गुलाब
गुलाब से बेहतर प्रेम के इजहार का कोई माध्यम नहीं हो सकता। इस बार मेरी योजना है कि सभी दोस्तों के बीच गुलाब के फूल बांटूंगा। फूल की खरीदारी वेलेंटाइन-डे के दिन ही होगी, जिससे खिला गुलाब ही दोस्तों तक पहुंचा सकूं। इसे लेकर उत्साहित हूं।
-कौशलेंद्र शुक्ल, शिवपुर शाहबाजगंज

वेलेंटाइन डे के लिए नौ सेक्टर में बांटा शहर
वेलेंटाइन डे पर किसी तरह की अप्रिय घटना न हो इसके लिए पुलिस ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। मनचलों पर पैनी नजर रखने के साथ वेलेंटाइन डे के विरोध के नाम पर उत्पात मचाने वाले संगठनों और लोगों पर सख्ती की तैयारी की है। इसके लिए शहर को तीन जोन और नौ सेक्टर में बांटा है। इन सभी जगहों पर सीओ और एसओ की ड्यूटी लगाई गई है। महिला सिपाहियों को सादे कपड़ों में सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। शहर के सभी मॉल, बाजार और पार्कों में पुलिस की विशेष नजर रहेगी। उन जगहों पर भी पुलिस कर्मी तैनात रहेंगे जहां युवा ज्यादा संख्या में जुटते हैं। पार्क और प्रमुख चौराहों पर एक दरोगा और दो सिपाही मुस्तैद रहेंगे।

वेलेंटाइन डे का विरोध या इस दिन के नाम पर छेड़छाड़ करने वालों पर पुलिस सख्ती से पेश आएगी। विरोध का एलान करने वाले संगठनों के पदाधिकारियों को मर्यादाओं में रहने के निर्देश दे दिए हैं। उपद्रव करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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- अनंत देव, एसएसपी
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