कार्यक्रम में दिव्यांगों को उपकरण दिए गए।
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दिव्यांगों के सहायक उपकरण वितरण समारोह में रविवार को गोरखपुर पहुंचे सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत ने भी बड़ा एलान किया और कहा कि अब दिव्यांगों के यूनिवर्सल आइडेंटिटी कार्ड (यूआईडी) बनाए जाएंगे। यह कार्ड देश के सभी राज्यों में मान्य होगा। इससे केंद्र और राज्य सरकार की सभी योजनाओं का लाभ लिया जा सकेगा। अभी जो कार्ड बने हैं, वह राज्य या फिर जिला स्तरीय सुविधाओं के लिए ही मान्य हैं। केंद्र सरकार ने दिव्यांगता की श्रेणी सात से बढ़ाकर 21 कर दी है। अब मानसिक रूप से परेशान लोग भी दिव्यांगता की श्रेणी में आएंगे।
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के खेल मैदान में आयोजित सहायक उपकरण वितरण समारोह में थावरचंद गहलोत ने कहा किअब इलेक्ट्रॉनिक हाथ, पैर का जमाना आ गया है। अभी तक लोहे या फिर लकड़ी के कृत्रिम अंग बनाए जा रहे थे लेकिन आगे ऐसा नहीं होगा। इलेक्ट्रॉनिक हाथ, पैर बनाने के लिए आर्टिफिशियल लिम्बस मैन्युफैक्चरिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एलिम्को) कानपुर और जर्मनी की एक कंपनी से करार हुआ है। अब तक 15 इलेक्ट्रॉनिक हाथ-पैर बनाए गए हैं। यह बेहद कारगर तकनीक पर आधारित है। इसकी मदद से गिलास उठाकर पानी पीया जा सकेगा। चाय का कप भी आसानी से उठाया जा सकेगा। इस उपकरण से सभी काम किए जा सकेंगे।
बच्चों के इलाज के लिए छह लाख की मदद
बोलने और सुनने में अक्षम प्रति बच्चे के इलाज पर सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय छह लाख रुपये खर्च कर रहा है। कान के पास ऑपरेशन करके सहायक उपकरण लगा दिया जाता है। इससे बच्चा बोलने और सुनने लगता है। उन्होंने कहा कि ऐसे ऑपरेशन से अब तक 1000 बच्चों का कारगर इलाज हो चुका है। मंत्रालय के इलाज का यह केंद्र उड़ीसा में है।
286 करोड़ से एलिम्को का विस्तार
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने एलिम्को कानपुर के अफसर, कर्मचारियों की तारीफ की। साथ ही कहा कि इसका विस्तार किया जाएगा। इस पर 286 करोड़ रुपये का बजट खर्च होगा। कर्मचारियों का वेतन भी बढ़ाया जाएगा। दिव्यांगों के सशक्तीकरण में एलिम्को बड़ा काम कर रहा है। शिविर आयोजन के लिए एलिम्को का नाम पांच बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में दर्ज किया जा चुका है।