गोरखपुर। शासन ने गोरखपुर जेल की सुरक्षा घेरा को मजबूत करने के लिए दो जैमर लगाने के योजना को मंजूरी दे दी है। 29 मार्च को इस मद में 1.21 करोड़ रुपये भी अवमुक्त कर दिए गए। गोरखपुर के अलावा प्रतापगढ़ जेल में भी जैमर लगेगा है। सरकार ने काम पूरा करने का जिम्मा ईसीआईएल (इलेक्ट्रानिक कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड) को दिया गया है।
साल 2011 से गोरखपुर जेल में जैमर लगाने की मांग शासन ने मंजूर कर ली है। 29 मार्च को गोरखपुर और प्रतापगढ़ जेल में दो - दो सेट जैमर लगाने के लिए 1.21 करोड़ रुपये जारी करने के साथ ही इसकी जानकारी आईजी कारागार को दे दी गई।
जेल के अंदर मोबाइल का इस्तेमाल होने के कारण अपराध की घटनाएं बढ़ने और कानून - व्यवस्था के लिए चुनौती खड़ी होने की शिकायत लगातार मिल रही थी। डीएम, एसएसपी के छापे में दिसंबर 2015 में पुलिस को बंदियों के बैरक से मोबाइल, सिमकार्ड के साथ ही आपत्तिजनक सामान बरामद हुआ था।
21 मार्च 2016 को टेंपो के केबिन की तलाशी लेने पर पुलिस को तीन मोबाइल फोन, शराब, मीटर ओर गुटखा मिला था। उम्मीद जताई जा रही है कि छह महीने के अंदर जेल में जैमर लगाने का काम पूरा हो जाएगा।
62 एकड़ में है जेल
गोरखपुर जेल 62 एकड़ के क्षेत्रफल में बना है। 15 एकड़ में बंदियों का बैरक होने के साथ ही 47 एकड़ में अधिकारियों का आवास, कार्यालय है। जैमर लगने के बाद से मोबाइल पर बातचीत नहीं हो पाएगी। आवास और आफिस में लगे लैंड लाइन नंबर पर जैमर का कोई असर नहीं होगा।
- वर्ष 2011 से ही जेल परिसर में जैमर लगाने की मांग चल रही थी। अब तक चार बार इसका प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। जैमर लगने से सुरक्षा-व्यवस्था मजबूत होगी। - एसके शर्मा, जेल अधीक्षक