देश को वर्ष 2035 तक टीबी मुक्त करने का लक्ष्य पूरा करने के लिए ट्रू नेट मशीन का इस्तेमाल होगा। इसके लिए पीएमओ से देश के 50 जिलों का चयन किया गया है। इसमें सूबे के पांच जिले गोरखपुर, बाराबंकी, जालौन, गौतमबुद्ध नगर, फिरोजाबाद शामिल हैं।
बीते हफ्ते केंद्र सरकार की पहल पर सेंट्रल टीबी डिवीजन दिल्ली से प्रेक्षक गोरखपुर आए थे। इन्हें यहां ट्रू नेट मशीन लगाने के लिए डीएमसी (डिजाइनेटेड माइक्रोस्कोपिक सेंटर) का चयन करना था। प्रेक्षकों ने बताया था कि स्वदेशी तकनीक से बनी इस मशीन से किए गए टेस्ट की रिपोर्ट सीबीनेट मशीन की तुलना में कितनी गुणवत्ता पूर्ण है, इसकी टेस्टिंग का काम शुरू किया गया है। उन्होंने मशीन लगाने के लिए पिपराइच और सोनबरसा की डीएमसी का चयन किया है। इसके बाद यहां मशीन लगाने की कवायद शुरू कर दी गई है।
सीबीनेट से ट्रू नेट क्यों
सीबीनेट मशीन की लागत लगभग 27 लाख रुपये है। यह विदेश से मंगानी पड़ती है। ये मशीन महंगी होने के कारण एक जिले में एक ही लग पाती है। वहीं इसके मुकाबले ट्रू नेट मशीन स्वदेशी है। इसकी लागत मात्र 2 लाख रुपये आ रही है। यह प्रयोग सफल होने पर जिले में कई डीएमसी पर ट्रू नेट मशीन लगेंगी। इससे मरीजों को राहत मिलेगी।
गोवा में बनी है मशीन
केंद्र सरकार के प्रयास से ट्रू नेट मशीन गोवा की एक कंपनी ने बनाई है। इसके संचालन के लिए जिला क्षय रोग के एलटी राजेश कुमार गुप्ता, पिपराइच के एलटी शंभू राज और सोनबरसा के एलटी उदयराज का एक दिन का प्रशिक्षण बंगलूरू में हो चुका है। इन्हें सीबीनेट और ट्रू नेट से जांच कर इसकी रिपोर्ट नेशनल ट्यूबरक्लोसिस रिसर्च इंस्टीट्यूट चेन्नई भेजनी होगी। एक माह की टेस्टिंग में दोनों ही मशीनों की जांच रिपोर्ट के आधार पर ट्रू नेट मशीन अगर कारगर साबित हुई तो इसे अन्य स्थानों पर लगाया जाएगा।
ये केंद्र सरकार की योजना है। इस पर काम शुरू हो गया है। ट्रू नेट मशीन अभी प्रयोग के तौर पर लगाया जा रहा है। यदि इसमें सफलता मिलती है तो जिले में कई जगहों पर यह मशीन लगाई जाएगी।
- डॉ. रामेश्वर मिश्र, जिला क्षय रोग अधिकारी