एक औंकार सेवा समिति के तत्वावधान में रविवार को जटाशंकर गुरुद्वारे में दसवें गुरु गोविंद सिंह महाराज के चारों साहबजादों की शहीदी पर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। इसके बाद कथा एवं अरदास का आयोजन हुआ। फिर श्रद्धालुओं ने गुरु का अटूट लंगर चखा।
सुबह सबसे पहले 10 बजे 24 घंटे से जारी सुखमनी साहब के पाठ का समापन के साथ सत्संग समारोह की शुरुआत हुई। श्रद्धालुओं ने गुरु गोविंद सिंह के साहबजादे अजीत सिंह, जुझार सिंह, जोरावर सिंह और फतेह सिंह का शहादत दिवस श्रद्धापूर्वक मनाया। इस मौके पर जटाशंकर गुरुद्वारा में कीर्तन, कथा के साथ सेवा कार्य भी आयोजित हुए। दोपहर में बच्चों ने कथा, कीर्तन, सिमरन, कविता एवं पाठ के जरिए अपने धार्मिक ज्ञान का परिचय दिया। इसके बाद हजूरी रागी भाई प्रीतम सिंह के जत्थे ने गुरुवाणी का कीर्तन पेश किया, फिर अंबाला से आए धर्म प्रचारक भाई गुरजीत सिंह ने माता गुजरी, चार साहबजादों एवं चालीस सिखों की शहादत पर विस्तार से चर्चा की। कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता की खातिर गुरु गोविंद सिंह महाराज के चालीस सिख और दूसरी ओर दस लाख सैनिकों वाली मुगल फौज आमने-सामने थी।
गुरु के सिखों ने इस युद्ध में ऐसा पराक्रम दिखाया कि अत्याचारी हुकूमत के होश उड़ गए। अजीत सिंह व जुझार सिंह जंग में शहीद हो गए और जोरावर सिंह व फतेह सिंह को दीवार में चुनवा दिया गया। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से इस शहादत को याद रखने एवं इससे प्रेरित होने की अपील की। कथा के बाद संगत ने वाहे गुरु का सिमरन किया, फिर अरदास एवं गुरु के वचनों के साथ शहीदी समागम का समापन हुआ। संचालन जगनैन सिंह नीटू ने किया। इस मौके पर समिति के महामंत्री तेजपाल सिंह, जसपाल सिंह, हरवंश सिंह, सतवंत सिंह, गुरमीत सिंह, सुखमन कौर, संजम कौर, त्रिपता कौर, गुरमत सिंह, राजदीप कौर, अर्शदीप कौर, खुशरीत कौर, ऐशमीत कौर, सिमरप्रीत कौर, दलप्रीत सिंह, सोनू सिंह आदि मौजूद थे।