ट्रेनों में बेहतर सफाई की कोशिश में जुटी पूर्वोत्तर रेलवे ने अब एसी कोच की तर्ज पर स्लीपर कोच में भी डॅस्टबीन लगाने की तैयारी की है। प्रयोग के तौर पर गोरखधाम एक्सप्रेस को चुना गया है।
स्लीपर कोच में डॅस्टबीन न रहने से यात्री कूड़ा, कचरा बर्थ के पास ही फेंक देते हैं और कुछ रेलवे ट्रैक पर गंदगी फेंकते हैं। स्टेशन पर ट्रेन के रुकने पर भी गंदगी फेंकी जाती है। कोच में डॅस्टबीन रखे जाने से कोच के साथ ही स्टेशनों पर भी सफाई बनी रहेगी। पहले गोरखधाम एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में डॅस्टबीन लगाए जा रहे हैं। इसके बाद दूसरे ट्रेनों में डॅस्टबीन लगाए जाएंगे। कोच के दोनों ओर टॉयलेट के पास बने वास बेसिन के नीचे विशेष आकार के डॅस्टबीन रखे जाएंगे। इसमें पॉलीबैग रखा रहेगा कि सफाई में भी दिक्कत न हो।
टॉयलेट में भी डॅस्टबीन रखे जाएंगे
गोरखपुर। अब बच्चों के इस्तेमाल में आने वाले डायपर, सेनेटरी नैपकीन आदि से बायोटॉयलेट चोक नहीं होंगे। इसके लिए बायोटॉयलेट में छोटे आकार के डॅस्टबीन रखे जाएंगे। गोरखधाम एक्सप्रेस, राप्तीसागर एक्सप्रेस से इसकी शुरूआत की गई है।
ट्रेनों के सभी स्लीपर कोच में डॅस्टबीन लगाए जाएंगे। गोरखधाम एक्सप्रेस से इसकी शुरूआत की गई है। कई कोच में लगा दिए गए हैं। इसके बाद दूसरे ट्रेनों में भी डॅस्टबीन लगाए जाएंगे। इससे कोच साफ सुथरा रहेगा और स्टेशन पर भी सफाई बनी रहेगी।
डीके तिवारी, वरिष्ठ कोचिंग डिपो अधिकारी एनईआर लखनऊ मंडल